मंडी की अदालत का सख्त फैसला: चचेरी बहन से छेड़छाड़ करने वाले आरोपी को एक साल की जेल, 5,000 रुपये का जुर्माना


मंडी: हिमाचल प्रदेश की मंडी जिला अदालत ने रिश्तों को शर्मसार करने वाले एक मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए आरोपी सतीश कुमार को सलाखों के पीछे भेज दिया है। न्यायालय ने आरोपी को अपनी ही चचेरी बहन के साथ छेड़छाड़ करने का दोषी पाते हुए भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 354 के तहत एक वर्ष के साधारण कारावास और 5,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। न्यायाधीश ने अपने फैसले में स्पष्ट रूप से टिप्पणी की कि महिलाओं के विरुद्ध होने वाले ऐसे अपराधों में सख्ती बरतना समाज में कानून का इकबाल कायम रखने के लिए अनिवार्य है। The Mandi District Court emphasized that strict sentencing is necessary to maintain social order and deter crimes against women within domestic circles.

यह मामला दिसंबर 2017 का है, जब पीड़िता ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई थी कि उसका चचेरा भाई सतीश कुमार भोजन करने के बहाने उसके कमरे में दाखिल हुआ था। वहां उसने सेल्फी लेने की इच्छा जताई और इसी दौरान पीड़िता के साथ अश्लील हरकतें और छेड़छाड़ की। घटना के तुरंत बाद महिला ने अपने पति और पिता को इस शर्मनाक हरकत की जानकारी दी, जिसके आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया था। मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने पीड़िता, उसके पति, पिता और पड़ोसियों सहित कुल 12 गवाहों को अदालत में पेश किया। न्यायालय ने पीड़िता की गवाही को पूरी तरह विश्वसनीय और स्वाभाविक मानते हुए बचाव पक्ष की उन दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें आरोपी को झूठा फंसाने की बात कही गई थी। The Prosecution's Strong Evidence and testimonies from family members played a crucial role in establishing the guilt of the accused beyond reasonable doubt.

हालांकि, अदालत ने आरोपी पर लगी 'पीछा करने' (Stalking) की धारा को हटा दिया। पुलिस ने प्रारंभिक जांच में छेड़छाड़ के साथ-साथ पीछा करने का आरोप भी लगाया था, लेकिन अदालत ने पाया कि दोनों के बीच नजदीकी रिश्तेदारी होने के कारण आरोपी का पीड़िता के घर आना-जाना एक सामान्य बात थी। साक्ष्यों के अभाव में इसे पीछा करने की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता था, इसलिए आरोपी को उस विशिष्ट आरोप से बरी कर दिया गया। सजा सुनाते वक्त अदालत ने समाज को कड़ा संदेश दिया कि पारिवारिक रिश्तों की आड़ में किए गए अपराधों को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। This Judicial Clarity on Stalking versus familial visits highlights the court's balanced approach while ensuring justice for the survivor of molestation.



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