नई दिल्ली: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए देश की गौरवशाली विरासत और भविष्य के उज्ज्वल रोडमैप को दुनिया के सामने रखा। अपने अभिभाषण में राष्ट्रपति ने विशेष रूप से 'वंदे मातरम' के 150 वर्ष पूरे होने का उल्लेख किया और इस अमर गीत के रचयिता बंकिम चंद्र चटर्जी को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। उन्होंने इस अवसर पर संसद में हुई विशेष चर्चा के लिए सांसदों की सराहना करते हुए कहा कि पिछला वर्ष भारत की प्रगति और अपनी सांस्कृतिक जड़ों को सहेजने के एक उत्सव के रूप में हमेशा याद रखा जाएगा। The Presidential Address in Parliament highlighted India's dual focus on technological advancement and the preservation of its deep-rooted cultural heritage.
अपने संबोधन के दौरान राष्ट्रपति ने देश के महान महापुरुषों के योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि भारत ने श्री गुरु तेग बहादुर जी का 350वां शहीदी दिवस और भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती को पूरे राष्ट्रीय सम्मान के साथ मनाया है। इसके अतिरिक्त, सरदार वल्लभभाई पटेल और भारत रत्न भूपेन हजारिका की जयंतियों ने 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' की संकल्पना को और अधिक सशक्त किया है। राष्ट्रपति मुर्मू ने जोर दिया कि जब युवा पीढ़ी अपने पूर्वजों के बलिदान और उपलब्धियों से जुड़ती है, तो राष्ट्र निर्माण का संकल्प और भी दृढ़ हो जाता है। This Commemoration of National Heroes serves as a vital bridge for the youth to understand India's journey toward becoming a developed nation.
भविष्य की ओर इशारा करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि वर्ष 2026 के साथ भारत इस शताब्दी के दूसरे चरण में गौरव के साथ प्रवेश कर चुका है। उन्होंने पिछले एक दशक की उपलब्धियों का विवरण देते हुए कहा कि भारत ने हर क्षेत्र में अपनी नींव को असाधारण रूप से मजबूत किया है। राष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि वर्तमान समय भारत के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ है, जहाँ से 'विकसित भारत' की ओर हमारी यात्रा और भी तीव्र गति से आगे बढ़ेगी। Viksit Bharat 2047 goals remain the central theme of the government's long-term vision for economic and social prosperity.