नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने कैंसर, डायबिटीज और हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियों के नाम पर "चमत्कारी इलाज" का दावा करने वाले भ्रामक विज्ञापनों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई शुरू कर दी है। गृह मंत्रालय द्वारा जारी एक महत्वपूर्ण अधिसूचना के तहत अब पांच केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर, चंडीगढ़, लक्षद्वीप, दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव, तथा पुडुचेरी के उपराज्यपालों (LG) और प्रशासकों को विशेष शक्तियां सौंपी गई हैं। इन शक्तियों के मिलने के बाद अब उपराज्यपाल इन क्षेत्रों में ऐसे भ्रामक प्रचार करने वाले संस्थानों की न केवल तलाशी ले सकेंगे, बल्कि उनके दस्तावेज जब्त कर कानूनी मुकदमा भी चला सकेंगे। The President of India has authorized these administrators to exercise the powers of a 'State Government' to effectively curb fraudulent health claims under the Drugs and Magic Remedies (Objectionable Advertisements) Act, 1954.
यह सख्त कदम 'ड्रग्स एंड मैजिक रेमेडीज अधिनियम, 1954' के प्रावधानों को धरातल पर उतारने के लिए उठाया गया है, जिसका उद्देश्य जनता को दवाओं के झूठे प्रचार से बचाना है। नई व्यवस्था के तहत अब उपराज्यपाल राजपत्रित अधिकारियों (Gazetted Officers) को जांच और छापेमारी के लिए अधिकृत कर सकेंगे, जिससे प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में चल रहे आपत्तिजनक विज्ञापनों पर तुरंत लगाम लगाई जा सकेगी। This law covers not only allopathic medicines but also extends its reach to AYUSH products that claim to possess "miraculous" or supernatural healing properties. सरकार का मानना है कि प्रशासनिक अधिकारियों को सीधे अधिकार मिलने से फाइलों की आवाजाही में होने वाली देरी खत्म होगी और स्वास्थ्य के नाम पर जनता से धोखाधड़ी करने वाले गिरोहों पर नकेल कसी जा सकेगी।
हाल के वर्षों में सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ऐसे विज्ञापनों की बाढ़ आ गई है जो बिना किसी वैज्ञानिक प्रमाण के गंभीर बीमारियों को जड़ से खत्म करने का दावा करते हैं। गृह मंत्रालय की इस अधिसूचना से विशेषकर जम्मू-कश्मीर और चंडीगढ़ जैसे क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर चल रहे अवैध धंधों पर बड़ा प्रहार होगा। Authorities have been instructed to monitor all promotional content closely and take immediate action if any product is found violating the prescribed standards of medical claims. इस पहल का मुख्य उद्देश्य नागरिकों को गुमराह होने से बचाना और केवल प्रमाणित चिकित्सा पद्धतियों को ही बढ़ावा देना है।