हनीट्रैप कांड: आरोपी महिला वकील की तीसरी जमानत याचिका भी खारिज, शादी टूटने की दलील भी कोर्ट में हुई नाकाम



पानीपत: हरियाणा के पानीपत में सरकारी अस्पताल के सीनियर मलेरिया इंस्पेक्टर को हनीट्रैप में फंसाकर लाखों रुपये की फिरौती मांगने के मामले में आरोपी महिला वकील को अदालत से एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश योगेश चौधरी की अदालत ने आरोपी की तीसरी जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है। बचाव पक्ष ने इस बार अपनी दलील में सगाई टूटने और शादी रुकने का मानवीय आधार पेश किया था, लेकिन अदालत ने अपराध की गंभीरता और पीड़ित द्वारा गवाहों को प्रभावित किए जाने की आशंका को देखते हुए राहत देने से साफ इनकार कर दिया। The judicial decision underscores the gravity of the charges involving pre-planned conspiracy and extortion using digital traps.

मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार, आरोपी महिला ने पहले पीड़ित इंस्पेक्टर से दोस्ती बढ़ाई और फिर एक सोची-समझी साजिश के तहत उन्हें एक फ्लैट पर आमंत्रित किया। आरोप है कि वहां पीड़ित को कोल्डड्रिंक में नशीला पदार्थ पिलाकर बेहोश किया गया और आपत्तिजनक स्थिति में उनके वीडियो बना लिए गए। इन वीडियो के आधार पर झूठे केस में फंसाने की धमकी देकर शुरुआत में 11 लाख रुपये की मांग की गई, जिसे बाद में 4 लाख रुपये में तय किया गया। पीड़ित की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए पुराना औद्योगिक थाना पुलिस ने 7 जुलाई को मामला दर्ज किया था, जिसके बाद से आरोपी महिला वकील सलाखों के पीछे है। The systematic nature of the trap, involving drugging and digital blackmail, has made it a high-profile criminal case in the city.

सुनवाई के दौरान सरकारी वकील और पीड़ित के अधिवक्ता ने जमानत का कड़ा विरोध करते हुए तर्क दिया कि केवल चालान पेश हो जाना आरोपी को रिहा करने का आधार नहीं हो सकता। कोर्ट ने माना कि चूंकि अभी मामले में आरोप (Charges) तय होने बाकी हैं और मुख्य गवाहों के बयान दर्ज नहीं हुए हैं, ऐसे में आरोपी की रिहाई जांच और न्याय प्रक्रिया को बाधित कर सकती है। धोखाधड़ी, अमानत में खयानत और सबूत मिटाने जैसी धाराओं में घिरी आरोपी वकील की शादी की दलील को भी अभियोजन पक्ष ने केवल सहानुभूति बटोरने का जरिया बताया। इस फैसले के बाद अब आरोपी को ट्रायल शुरू होने तक जेल में ही रहना होगा। The court's refusal to grant bail even on matrimonial grounds highlights the priority given to witness protection and the integrity of the trial.



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