अयोध्या: अंतर्राष्ट्रीय हिंदू परिषद के अध्यक्ष डॉ. प्रवीण भाई तोगड़िया ने अयोध्या दौरे के दौरान हिंदू समाज की एकता पर जोर देते हुए एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है। श्रीराम जन्मभूमि के दर्शन करने पहुंचे तोगड़िया ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच चल रहे हालिया विवाद पर अपनी चुप्पी तोड़ी। उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म में शंकराचार्य का पद और योगी आदित्यनाथ की भूमिका, दोनों ही अत्यंत पूजनीय हैं। उनके अनुसार, जिस तरह एक परिवार के भाइयों के बीच कभी-कभी मतभेद या तकरार हो जाती है, यह विवाद भी वैसा ही है जिसे आपसी संवाद से सुलझा लिया जाएगा। The Hindu Unity Message from Pravin Togadia aims to bridge the gap between spiritual leadership and political administration within the community.
राम मंदिर निर्माण को लेकर तोगड़िया ने अयोध्यावासियों के पूर्वजों के संघर्ष को नमन किया। उन्होंने कहा कि पिछले 40 वर्षों में तो पूरे देश ने अपनी भूमिका निभाई, लेकिन साढ़े चार सौ साल तक यह लड़ाई अवध के लोगों ने लड़ी है। यहाँ के पूर्वजों ने राम मंदिर के संकल्प के लिए नंगे पाँव रहकर जो त्याग किया, उसी का परिणाम है कि आज 500 वर्षों की प्रतीक्षा समाप्त हुई है। चंपतराय की उपस्थिति में रामलला के दर्शन करने के बाद उन्होंने इसे हर सनातनी के लिए गौरव का क्षण बताया। The Legacy of Sacrifice by the ancestors of Ayodhya was highlighted as the core strength behind the successful construction of the Ram Mandir.
तोगड़िया ने उत्तराखंड की धामी सरकार द्वारा चार धाम यात्रा में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर लगाई गई पाबंदी का पुरजोर समर्थन किया और इसे 'पुण्य का कार्य' बताया। उन्होंने मांग की कि मंदिरों के बाहर पूजा सामग्री और फूल बेचने का काम भी केवल हिंदुओं के पास ही होना चाहिए। इसके अलावा, यूजीसी के नए नियमों (UGC Rules 2026) पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने 'बंटेंगे तो कटेंगे' के नारे का समर्थन किया और कहा कि हिंदू समाज में जाति के आधार पर किसी भी तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए। Non-Hindu Entry Bans in pilgrimage sites and communal solidarity remain central themes of Togadia's current socio-political stance.