अमृतसर: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान गुरुवार दोपहर 12 बजे सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था, श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष पेश हुए। मुख्यमंत्री ने अकाल तख्त सचिवालय पहुँचने से पहले नंगे पांव सचखंड श्री हरमंदिर साहिब में नतमस्तक होकर माथा टेका। वे अपने साथ एक काले रंग का बैग लेकर पहुंचे थे, जिसमें विवादित मुद्दों से संबंधित दस्तावेज और स्पष्टीकरण बताए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री को जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज ने सिखी से जुड़े मुद्दों, गोलक और एक आपत्तिजनक वीडियो के संदर्भ में की गई विवादास्पद बयानबाजी पर जवाब देने के लिए तलब किया था।
The appearance marks a significant religious procedure, with Mann becoming the fourth Chief Minister of Punjab to be summoned by the Akal Takht. मुख्यमंत्री की पेशी का समय सुबह से चार बार बदला गया, जो अंततः दोपहर 12 बजे तय हुआ। चूंकि भगवंत मान अमृतधारी सिख नहीं हैं, इसलिए मर्यादा के अनुसार वे अकाल तख्त की फसील (ऊपरी चबूतरे) पर पेश होने के बजाय सचिवालय के भीतर जत्थेदार और पांच सिंह साहिबान के सामने अपना पक्ष रखेंगे। इससे पहले दिवंगत भीम सेन सच्चर, सुरजीत सिंह बरनाला और प्रकाश सिंह बादल जैसे पूर्व मुख्यमंत्रियों को भी विभिन्न धार्मिक मामलों में यहाँ तलब किया जा चुका है।
The high-profile appearance has drawn global attention from the Sikh community, as the Jathedar will deliberate on Mann's explanation before pronouncing any religious 'tankhah' (penance). जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज ने 5 जनवरी को मुख्यमंत्री द्वारा सिखों की धार्मिक भावनाओं को कथित तौर पर आहत करने वाले बयानों पर कड़ा संज्ञान लिया था। फिलहाल सचिवालय के भीतर बंद कमरे में सुनवाई जारी है। सुरक्षा कारणों से स्वर्ण मंदिर परिसर और अकाल तख्त के आसपास भारी पुलिस बल और एसजीपीसी की टास्क फोर्स तैनात की गई है। इस पेशी के बाद आने वाला धार्मिक फैसला पंजाब की राजनीति और धार्मिक समीकरणों पर गहरा असर डाल सकता है।