चंडीगढ़: पंजाब सरकार ने राज्य से ड्रग तस्करी और संगठित अपराध के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए 72 घंटे का एक सघन अभियान 'ऑपरेशन प्रहार' (वार अगेंस्ट ड्रग) शुरू किया है। पुलिस महानिदेशक (DGP) गौरव यादव के नेतृत्व में शुरू हुए इस अभियान के पहले चरण में राज्य भर के लगभग 2,000 संदिग्ध ठिकानों पर 12,000 से अधिक पुलिसकर्मियों ने छापेमारी की है। खुफिया एजेंसियों की मैपिंग में यह तथ्य सामने आया है कि करीब 2,000 सक्रिय गैंगस्टरों में से 60 कुख्यात अपराधी विदेशों में बैठकर पंजाब में नशा और हथियारों की सप्लाई का सिंडिकेट चला रहे हैं, जिन्हें वापस भारत लाने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
राज्य पुलिस ने इस ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए एक विशेष ढांचा तैयार किया है, जिसमें काउंटर इंटेलिजेंस, एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स (AGTF) और एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) के शीर्ष अधिकारियों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। ADGP आशीष चौधरी को विदेशों में छिपे अपराधियों के प्रत्यर्पण की कमान दी गई है, जबकि डीआईजी गुरमीत चौहान और अखिल चौधरी क्रमशः स्थानीय गैंगस्टर नेटवर्क और ड्रग सप्लाई चेन को तोड़ने का काम कर रहे हैं। पुलिस अब केवल गिरफ्तारियां ही नहीं कर रही, बल्कि ड्रग तस्करों की संपत्तियों को भी 'प्रोसिड्स ऑफ क्राइम' के तहत फ्रीज कर रही है, ताकि उनकी आर्थिक कमर तोड़ी जा सके।
नशा तस्करों के खिलाफ आम जनता की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने एक एंटी-ड्रग हेल्पलाइन (93946 93946) जारी की है और सूचना देने वालों के लिए ₹10 करोड़ तक की इनाम राशि की घोषणा की है। इस रिवॉर्ड पॉलिसी के तहत ड्रग की कमर्शियल बरामदगी और तस्करों की संपत्ति फ्रीज कराने में मदद करने वाले व्यक्तियों व पुलिस अधिकारियों को ₹20,000 से लेकर ₹2 लाख तक का पुरस्कार दिया जाएगा। DGP गौरव यादव ने स्पष्ट किया है कि गुमराह युवाओं के प्रति सहानुभूति रखी जाएगी, लेकिन समाज में आतंक फैलाने वाले और नशा बेचने वाले अपराधियों के खिलाफ किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी।