अयोध्या: अयोध्या के राजनीतिक और धार्मिक हलकों में उस समय हलचल तेज हो गई, जब कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया ने संकेत दिया कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी जल्द ही श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में रामलला के दर्शन करेंगे। पुनिया के अनुसार, राहुल गांधी ने पहले मंदिर के अधूरे होने के कारण दर्शन नहीं किए थे, लेकिन अब मंदिर का निर्माण पूर्ण होने और ध्वजारोहण संपन्न होने के बाद उनका अयोध्या जाना स्वाभाविक है। विशेष रूप से, 23 जनवरी 2026 को रक्षा मंत्रालय की 32 सदस्यीय संसदीय समिति अयोध्या का दौरा करने वाली है, जिसमें राहुल गांधी भी एक सदस्य के रूप में शामिल हैं। माना जा रहा है कि इसी आधिकारिक दौरे के दौरान राहुल गांधी राम मंदिर जा सकते हैं।
The news has sparked a political debate, with the BJP alleging that the visit is a mere "photo opportunity" for political gains. भाजपा प्रवक्ताओं ने सवाल उठाया कि दो साल पहले हुई प्राण-प्रतिष्ठा के समय राहुल गांधी ने दूरी क्यों बनाई थी। वहीं, कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि राहुल गांधी हिंदू धर्म की परंपराओं का सम्मान करते हैं और वे अपनी सुविधा व समय के अनुसार 'प्रभु का बुलावा' आने पर दर्शन करेंगे। तनुज पुनिया ने स्पष्ट किया कि शंकराचार्यों द्वारा मंदिर की पूर्णता के शास्त्र सम्मत तर्कों के बाद अब राहुल गांधी के दर्शन करने में कोई बाधा नहीं है।
Religious leaders in Ayodhya have given a mixed response to the potential visit. हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास ने कहा कि रामलला की शरण में आने वाले हर व्यक्ति का स्वागत है, लेकिन उन्होंने राहुल गांधी से उनके सहयोगियों द्वारा सनातन धर्म पर दिए गए बयानों पर स्पष्टीकरण भी मांगा। दूसरी ओर, जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने इस कदम का स्वागत करते हुए इसे सकारात्मक बताया। प्रशासन ने 23 जनवरी के इस हाई-प्रोफाइल दौरे के लिए सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता कर दी है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर अभी राहुल गांधी के मंदिर दर्शन का विस्तृत प्रोटोकॉल जारी होना बाकी है, लेकिन इस संभावित दौरे ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में गर्माहट पैदा कर दी है।