रीवा: मध्य प्रदेश के रीवा जिले से एक ऐसा विस्मयकारी मामला सामने आया है जिसने चिकित्सा विज्ञान के स्थापित सिद्धांतों को झकझोर कर रख दिया है। यहाँ के रहने वाले 75 वर्षीय रिटायर्ड जॉइंट कलेक्टर मोहन लाल द्विवेदी पिछले पांच दशकों (50 साल) से एक पल के लिए भी नहीं सोए हैं। सामान्यतः माना जाता है कि बिना नींद के मानव शरीर और मस्तिष्क का जीवित रहना असंभव है, लेकिन मोहन लाल न केवल जीवित हैं, बल्कि पूरी तरह स्वस्थ और ऊर्जावान भी हैं। उन्होंने बताया कि अंतिम बार उन्होंने आपातकाल (इमरजेंसी) के दौर में नींद ली थी, जिसके बाद से उनकी आँखों से नींद पूरी तरह गायब हो गई। आश्चर्य की बात यह है कि इतनी लंबी अवधि तक न सोने के बावजूद उन्हें न तो थकान महसूस होती है और न ही किसी प्रकार की मानसिक या शारीरिक बीमारी ने उन्हें घेरा है।
मोहन लाल की कार्यशैली उनके सेवाकाल के दौरान भी सहकर्मियों के लिए अचम्भा बनी रही। वे बाणसागर बांध परियोजना जैसे महत्वपूर्ण कार्यों के समय कई किलोमीटर पैदल चलते थे और बिना रुके घंटों फाइलें निपटाते थे, जबकि उनके अधीनस्थ कर्मचारी थकान से चूर हो जाते थे। नींद न आने की इस स्थिति को लेकर उन्होंने दिल्ली और मुंबई के विख्यात न्यूरोलॉजिस्टों से संपर्क किया और योग-प्राणायाम का भी सहारा लिया, परंतु विशेषज्ञों के पास उनकी इस अनोखी शारीरिक स्थिति (Rare Medical Phenomenon) का कोई वैज्ञानिक उत्तर नहीं है। रात के समय जब पूरी दुनिया सोती है, तब मोहन लाल किताबें पढ़कर या टहलकर अपना समय व्यतीत करते हैं। The case of Mohan Lal Dwivedi defies the biological necessity of sleep, making him a living mystery for the global medical fraternity.
चिकित्सा जगत में आमतौर पर इनसोम्निया (Insomnia) के मरीजों में याददाश्त की कमी, चिड़चिड़ापन और अंगों की विफलता जैसे लक्षण देखे जाते हैं, लेकिन मोहन लाल के मामले में स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत है। वे आज भी घंटों एक ही मुद्रा में बैठकर ध्यान लगा सकते हैं और उनकी स्मरण शक्ति अद्भुत है। डॉक्टरों का मानना है कि यह मामला 'क्रोनिक इनसोम्निया' का एक अत्यंत दुर्लभ रूप हो सकता है जहाँ मस्तिष्क ने बिना सोए खुद को रिचार्ज करना सीख लिया है। रीवा के इस 'जागते हुए शख्स' की कहानी अब सोशल मीडिया और वैज्ञानिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है। This extraordinary endurance raises fundamental questions about human physiology and the untapped potential of the nervous system.