मथुरा: कान्हा की नगरी ब्रज में विश्व प्रसिद्ध होली उत्सव का बिगुल बज चुका है। भक्ति और प्रेम के इस महापर्व की तिथियों की घोषणा के साथ ही बरसाना और नंदगांव में उत्सव की तैयारियां तेज हो गई हैं। कार्यक्रम के अनुसार, 24 फरवरी 2026 को लाड़ली जी (श्रीजी) मंदिर में 'लड्डू होली' के साथ मुख्य फाल्गुन महोत्सव का भव्य शुभारंभ होगा। इसके अगले दिन यानी 25 फरवरी को बरसाना की ऐतिहासिक 'लठामार होली' खेली जाएगी, जहाँ राधारानी के आंगन में हुरियारिनों की लाठियां और हुरियारों की ढालों का मिलन होगा। उत्सव की इस कड़ी में 26 फरवरी को नंदगांव में लठामार होली का आयोजन किया जाएगा, जहाँ बरसाना की गोपियां फाग गीतों की धुन पर प्रेम रस की वर्षा करेंगी। ब्रज की यह अनूठी परंपरा देश-विदेश से आने वाले हजारों श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
ब्रज में होली केवल एक दिन का त्यौहार नहीं, बल्कि बसंत पंचमी से शुरू होने वाली 40 दिवसीय सांस्कृतिक यात्रा है। श्रीजी मंदिर के सेवायत रास बिहारी गोस्वामी के अनुसार, मंदिर में 'होली का डांडा' गढ़ते ही समाज गायन की शुरुआत हो जाती है, जो फाल्गुन पूर्णिमा तक निरंतर चलती है। बरसाना लठामार होली (Lathmar Holi Tradition Barsana) की यह दिव्य परंपरा विक्रम संवत 1569 से चली आ रही है, जिसे रसिक संत नारायण भट्ट ने पुनर्जीवित किया था। महाशिवरात्रि के दिन लठामार होली की प्रथम चौपाई निकलने के साथ ही ब्रज की गलियों में अबीर-गुलाल उड़ने लगता है। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन और उत्तर प्रदेश पर्यटन (UP Tourism Braj Holi Updates) विभाग ने सुरक्षा और दर्शन के पुख्ता इंतजाम किए हैं।
ब्रज की होली के सांस्कृतिक रंग
इस उत्सव का आध्यात्मिक महत्व समझाते हुए ब्रजाचार्य पीठ के प्रवक्ता घनश्याम भट्ट ने बताया कि लठामार होली राधा-कृष्ण के निश्छल प्रेम और गोपी भाव का प्रतीक है। 25 फरवरी को जब नंदगांव के हुरियारे 'रंगीली गली' में ढाल सजाकर पहुँचेंगे, तो जय राधे के जयकारों के बीच होने वाली लाठियों की थाप से पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाएगा। प्रशासन ने मथुरा-वृंदावन (Mathura Vrindavan Holi Traffic Plan) के लिए विशेष ट्रैफिक प्लान जारी किया है ताकि श्रद्धालुओं को मंदिर पहुँचने में सुगमता रहे। भक्ति, शक्ति और प्रेम का यह अनूठा संगम एक बार फिर पूरी दुनिया को ब्रज के रंग में सराबोर करने के लिए तैयार है।