सतना जिला अस्पताल में सिस्टम की बेरुखी: एंबुलेंस का दरवाजा जाम होने से तड़प-तड़पकर बूढ़े मरीज की मौत, स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही उजागर


सतना: मध्य प्रदेश के सतना जिले से सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। सरदार वल्लभ भाई पटेल जिला अस्पताल में 108 एंबुलेंस का दरवाजा समय पर न खुलने के कारण एक 67 वर्षीय बुजुर्ग राम प्रसाद की जान चली गई। रामनगर के रहने वाले राम प्रसाद रविवार सुबह अचानक बेहोश हो गए थे, जिसके बाद उन्हें गंभीर हालत में जिला अस्पताल रेफर किया गया था। एंबुलेंस अस्पताल के द्वार तक तो पहुंच गई, लेकिन तकनीकी खराबी के कारण उसका पिछला दरवाजा जाम हो गया। The tragic incident highlights the crumbling state of Emergency Medical Services where a mechanical failure turned fatal for a critical patient.

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हृदयविदारक वीडियो में देखा जा सकता है कि एंबुलेंस का दरवाजा खोलने के लिए टेक्नीशियन और स्थानीय लोग काफी देर तक जद्दोजहद करते रहे। लोगों ने लात-घूंसे मारे और औजारों से गेट तोड़ने की कोशिश की, यहाँ तक कि ड्राइवर को खिड़की के रास्ते अंदर घुसते देखा गया। इस दौरान मरीज अंदर ही सांसों के लिए संघर्ष करता रहा। जब काफी मशक्कत के बाद दरवाजा खुला और राम प्रसाद को बाहर निकाला गया, तब तक उनकी मृत्यु हो चुकी थी। This grave lapse in Ambulance Maintenance has raised serious questions about the safety of patients relying on government-run 108 services.

स्वास्थ्य विभाग ने अपना पल्ला झाड़ते हुए दावा किया है कि मरीज की मौत रास्ते में ही हो गई थी, लेकिन परिजनों ने इस बयान को सिरे से खारिज कर दिया है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि यदि एंबुलेंस का दरवाजा समय पर खुल जाता और समय रहते इलाज मिलता, तो शायद राम प्रसाद आज जीवित होते। सतना जिले में खस्ताहाल एंबुलेंस और स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही का यह कोई पहला मामला नहीं है, लेकिन इस घटना ने प्रशासन के दावों की पोल खोल दी है। The incident serves as a grim reminder that Systemic Negligence and poor upkeep of medical equipment can lead to irreversible losses for common citizens.


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