नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म I-PAC के ठिकानों पर ईडी (ED) की छापेमारी को लेकर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला। जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान माहौल उस समय तनावपूर्ण हो गया जब ममता बनर्जी का पक्ष रख रहे वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल की एक टिप्पणी पर पीठ ने कड़ी नाराजगी जताई। सिब्बल ने जब यह कहा कि "इस कोर्ट को यह मानना होगा कि हाई कोर्ट न्याय नहीं दे सकता", तब जस्टिस मिश्रा ने उन्हें झिड़कते हुए कहा "आप मेरे मुंह में अपने शब्द नहीं डाल सकते, हम खुद तय करेंगे कि क्या मानना है और क्या नहीं।"
The legal battle intensified as the Enforcement Directorate (ED) moved a fresh application seeking the suspension of three top West Bengal IPS officers, including DGP Rajeev Kumar. ईडी ने आरोप लगाया है कि इन अधिकारियों ने मुख्यमंत्री के साथ मिलकर जांच में बाधा डाली और साक्ष्यों की चोरी में मदद की। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि कलकत्ता हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान भारी हंगामा हुआ और एएसजी एसवी राजू का माइक बार-बार बंद किया गया। उन्होंने इसे 'लोकतंत्र पर भीड़तंत्र का हावी होना' करार दिया। कोर्ट ने हाई कोर्ट में हुए घटनाक्रम पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इस मामले को अत्यंत गंभीर माना और संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर समीक्षा करने की बात कही।
Defending the Chief Minister, Kapil Sibal argued that the ED was conducting "parallel proceedings" to interfere with electoral data and democratic processes. सिब्बल ने आरोप लगाया कि I-PAC के ठिकानों से जो लैपटॉप और फाइलें मुख्यमंत्री लेकर गई थीं, उनमें गोपनीय चुनावी डेटा था, जिसके बिना पार्टी चुनाव नहीं लड़ सकती। उन्होंने दावा किया कि चुनाव में गड़बड़ी करने के लिए डेटा चुराने की कोशिश हो रही है। दूसरी ओर, ईडी का कहना है कि मुख्यमंत्री ने छापेमारी के दौरान कानून की प्रक्रिया में सीधा हस्तक्षेप किया है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए फिलहाल कोई अंतरिम आदेश तो नहीं दिया, लेकिन स्पष्ट किया कि न्यायिक गरिमा से समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।