नई दिल्ली: बिहार विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस से इस्तीफा दे चुके पूर्व केंद्रीय मंत्री शकील अहमद ने राहुल गांधी के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उन्हें भारतीय राजनीति का सबसे 'डरपोक' (Insecure) राजनेता करार दिया है। न्यूज़18 को दिए एक विशेष साक्षात्कार में शकील अहमद ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी को अपनी ही पार्टी के मजबूत और पुराने कांग्रेसी नेताओं से डर लगता है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी पौधा लगाने से ज्यादा उसे उखाड़ने में रुचि रखते हैं और यही कारण है कि वे दूसरी पार्टियों से आए नए नेताओं को अधिक तरजीह देते हैं ताकि उन पर आसानी से नियंत्रण रखा जा सके। This scathing attack from a former Union Minister has sparked a fresh political row over Congress Internal Leadership.
शकील अहमद ने पार्टी के संगठनात्मक ढांचे पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि मल्लिकार्जुन खरगे केवल नाम के अध्यक्ष हैं, जबकि असली 'रिमोट कंट्रोल' राहुल गांधी के हाथों में ही है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी को 'मजबूत कांग्रेस' तो चाहिए, लेकिन 'कांग्रेसी मजबूर' चाहिए, जो पूरी तरह उनके नियंत्रण में रहें। अहमद के अनुसार, राहुल गांधी अपने से अधिक उम्र के अनुभवी नेताओं के साथ बैठना पसंद नहीं करते क्योंकि वहां उन्हें सम्मानजनक शब्दों का प्रयोग करना पड़ता है और वे 'बॉस' वाली फीलिंग के साथ समझौता नहीं कर सकते। The veteran leader claimed that Rahul Gandhi prefers outsiders over grassroots workers to maintain a sense of Absolute Control within the party.
राहुल गांधी के 'संविधान बचाओ' अभियान पर प्रहार करते हुए शकील अहमद ने इसे पूरी तरह से विफल और दिखावा बताया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि एक तरफ राहुल गांधी संविधान हाथ में लेकर भाजपा और आरएसएस के खिलाफ भाषण देते रहे, वहीं दूसरी ओर चुनाव से ठीक पहले उन्हीं विचारधाराओं के 16-17 नेताओं को कांग्रेस में शामिल कर टिकट दिया गया। अहमद ने इसे वैचारिक विरोधाभास करार देते हुए कहा कि राहुल गांधी का मुस्लिम कार्ड भी अब पूरी तरह फेल हो चुका है। This critique of the Constitution Campaign and the party's selection criteria highlights a deep-seated Ideological Conflict following recent electoral setbacks.