चंडीगढ़/नई दिल्ली: शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आतिशी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सुखबीर बादल ने दिल्ली विधानसभा के स्पीकर विजेंद्र गुप्ता को एक औपचारिक पत्र लिखकर आतिशी को विधायक के रूप में अयोग्य घोषित करने की पुरजोर मांग की है। बादल ने आरोप लगाया कि 6 जनवरी 2026 को विधानसभा की कार्यवाही के दौरान आतिशी ने सिख गुरुओं के खिलाफ "ईशनिंदापूर्ण और आपत्तिजनक" टिप्पणियां की थीं, जिससे दुनिया भर के सिख समुदाय की धार्मिक भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची है। उन्होंने इस कृत्य को न केवल सदन की अवमानना बताया, बल्कि इसे एक विधायक के रूप में संवैधानिक और नैतिक मर्यादाओं का उल्लंघन भी करार दिया।
The controversy stems from the January 6 winter session, where Atishi allegedly made derogatory remarks during a discussion marking the 350th martyrdom anniversary of Guru Tegh Bahadur. सुखबीर बादल ने अपने पत्र में मांग की है कि आतिशी के खिलाफ धार्मिक भावनाओं को आहत करने (IPC 295A) और समुदायों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने (IPC 153A) के तहत आपराधिक मामला (FIR) दर्ज किया जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि जो व्यक्ति किसी अल्पसंख्यक समुदाय की आस्था का सार्वजनिक रूप से अपमान करता है, उसे कानून बनाने वाले सदन का हिस्सा बने रहने का कोई अधिकार नहीं है। बादल ने स्पीकर से अपील की है कि वे इस मामले में एक सख्त उदाहरण पेश करें ताकि भविष्य में कोई भी धार्मिक प्रतीकों का राजनीतिक लाभ के लिए अपमान न कर सके।
Meanwhile, the row has escalated with the Delhi Assembly Speaker issuing a formal notice to Atishi after a forensic report (FSL) allegedly confirmed that the video of her speech was untampered. विजेंद्र गुप्ता ने आतिशी से 19 जनवरी 2026 तक लिखित स्पष्टीकरण मांगा है। दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी (AAP) ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे भाजपा और अकाली दल की 'साजिश' बताया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इसे 'गंभीर पाप' करार दिया है, जबकि सुखबीर बादल का कहना है कि श्री अकाल तख्त साहिब सहित तमाम पंथिक संस्थाएं इस मामले पर नजर बनाए हुए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस विवाद का असर पंजाब और दिल्ली की राजनीति पर लंबे समय तक बना रह सकता है।