सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों पर सुनवाई: झारखंड के 'नसबंदी आंकड़ों' को बताया फर्जी; राज्यों को फटकार– "सिर्फ हवा में महल बना रहे हैं"



नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने देश में आवारा कुत्तों और मवेशियों की बढ़ती समस्या पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकारों की कड़ी खिंचाई की है। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने स्पष्ट रूप से कहा कि राज्यों के हलफनामे 'आंखों में धूल झोंकने' (Eye Wash) वाले हैं। कोर्ट उस समय सबसे अधिक नाराज हुआ जब झारखंड सरकार ने दावा किया कि उन्होंने मात्र 2 महीने के भीतर 1.6 लाख कुत्तों की नसबंदी कर दी है। बेंच ने इन आंकड़ों को पूरी तरह मनगढ़ंत और फर्जी करार देते हुए पूछा कि क्या यह व्यवहारिक रूप से संभव है? The Supreme Court's Criticism of Jharkhand's Data highlights the lack of ground-level implementation in animal birth control programs across India.

एमीकस क्यूरी (न्याय मित्र) गौरव अग्रवाल की रिपोर्ट ने राज्यों की पोल खोलकर रख दी है। असम में कुत्तों के काटने (Dog Bite) के आंकड़े डराने वाले हैं, जहाँ 2024 में 1.66 लाख मामले दर्ज हुए। वहीं, कर्नाटक जैसे राज्यों ने स्कूलों और अस्पतालों में कुत्तों की पहचान तो की, लेकिन उन्हें वहां से हटाया नहीं गया। सुप्रीम कोर्ट ने सख्त निर्देश दिया कि शैक्षणिक संस्थानों और अस्पतालों के चारों ओर बाउंड्री वॉल होना अनिवार्य है ताकि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। बेंच ने नाराजगी जताते हुए कहा कि राज्य केवल कागजों पर बजट दिखा रहे हैं, जबकि धरातल पर कोई ठोस 'डॉग शेल्टर' नजर नहीं आ रहा। This Safety Mandate for Educational Institutes aims to protect children from stray dog attacks within campus premises.

पर्यटन के लिहाज से महत्वपूर्ण राज्य गोवा और केरल में आवारा कुत्तों की समस्या पर भी चिंता जताई गई। जजों ने खुद अनुभव किया कि गोवा के समुद्र तटों (Beaches) पर कुत्तों का जमावड़ा पर्यटन को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है। गुजरात सरकार ने हालांकि इस मद में 60 करोड़ रुपये का बजट रखा है, लेकिन कोर्ट डॉग पाउंड्स की कमी को लेकर संतुष्ट नहीं दिखा। कोर्ट ने साफ किया कि इन बेसहारा जानवरों के लिए बहुत बड़े बुनियादी ढांचे की जरूरत नहीं है, बल्कि एक सुरक्षित बाड़े और उचित देखभाल की व्यवस्था अनिवार्य है। The Impact of Stray Dogs on Tourism in Goa underscores the need for effective relocation and management strategies in high-traffic tourist zones.

सुनवाई में हाईवे पर आवारा मवेशियों के कारण होने वाले हादसों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। कोर्ट ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और राज्यों को उन संवेदनशील जगहों (Hotspots) की पहचान करने का आदेश दिया जहाँ मवेशी सबसे अधिक आते हैं। आंध्र प्रदेश में 14,000 संस्थानों की फेंसिंग का काम जारी है, जिसकी कोर्ट ने सराहना की। अंत में, बेंच ने चेतावनी दी कि अगर राज्यों ने अगले हलफनामे में सटीक और सही डेटा पेश नहीं किया, तो कोर्ट कड़े आदेश पारित करने के लिए बाध्य होगा। This Inter-Agency Coordination for Highway Safety is critical to reducing accidents caused by stray cattle on high-speed corridors.



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