UAE राष्ट्रपति का भव्य स्वागत: पीएम मोदी ने एयरपोर्ट पहुंच तोड़ा प्रोटोकॉल, पश्चिम एशिया के तनावपूर्ण माहौल के बीच 'भाई' जैसा दिया संदेश



नई दिल्ली: संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान सोमवार शाम एक दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर भारत पहुंचे, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कूटनीतिक प्रोटोकॉल तोड़ते हुए हवाई अड्डे पर स्वयं उनकी अगवानी की। हवाई अड्डे पर दोनों नेताओं ने गर्मजोशी से गले मिलकर भारत और यूएई के बीच गहराते रणनीतिक संबंधों का एक मजबूत संदेश दिया है। His visit, which comes at the personal invitation of PM Modi, marks his third official trip to India as President and reflects the 'unprecedented momentum' in bilateral ties over the last decade. हवाई अड्डे से सीधे द्विपक्षीय वार्ता के लिए रवाना हुए दोनों नेताओं के बीच व्यापार, निवेश और ऊर्जा सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है, जिसके बाद राष्ट्रपति आज ही स्वदेश लौट जाएंगे।

यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब पश्चिम एशिया का राजनीतिक परिदृश्य अत्यंत अस्थिर है और ईरान-अमेरिका संबंधों में भारी गिरावट के साथ-साथ सऊदी अरब और यूएई के बीच यमन को लेकर तनाव चरम पर है। Analysts believe that the friction between the two Gulf giants over separatist movements in Southern Yemen has pushed the UAE to further strengthen its partnership with stable allies like India. हाल के महीनों में रियाद द्वारा तुर्की और पाकिस्तान जैसे देशों के साथ नए गुट बनाने की कोशिशों के बीच, अबू धाबी भारत को एक भरोसेमंद और संतुलित साझेदार के रूप में देख रहा है। इस बैठक में न केवल आर्थिक निवेश बल्कि रक्षा उद्योग सहयोग और रेड सी कॉरिडोर जैसे रणनीतिक क्षेत्रों पर भी गहन विमर्श होने की उम्मीद है।

दोनों नेताओं के बीच होने वाली वार्ता का मुख्य केंद्र गाजा में जारी संघर्ष और क्षेत्रीय शांति बहाल करने के प्रयासों पर भी रहेगा। The high-level exchanges between the two nations have been frequent, with the Crown Prince of Abu Dhabi and Dubai both visiting India in recent months, laying the groundwork for today’s presidential visit. भारत और यूएई के बीच यह बढ़ती नजदीकी न केवल द्विपक्षीय व्यापार के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि बदलते वैश्विक समीकरणों में नई दिल्ली की बढ़ती कूटनीतिक भूमिका को भी रेखांकित करती है। बैठक के बाद ऊर्जा पहलों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर बड़े समझौतों की घोषणा होने की संभावना जताई जा रही है।



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