केंद्रीय बजट 2026 से स्वास्थ्य क्षेत्र को बड़ी उम्मीदें: छोटे शहरों में बुनियादी ढांचे और मेडटेक नवाचार पर रहेगा फोकस



नई दिल्ली: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा 1 फरवरी को पेश किए जाने वाले केंद्रीय बजट 2026-27 (Union Budget 2026-27) से स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र को क्रांतिकारी बदलावों की उम्मीद है। इस बार विशेषज्ञों का मुख्य जोर टियर-II और टियर-III शहरों में चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार, टेलीमेडिसिन को बढ़ावा देने और देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में सार्वजनिक स्वास्थ्य खर्च को वर्तमान के 2 प्रतिशत से बढ़ाने पर है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत को वैश्विक स्वास्थ्य महाशक्ति बनना है, तो बजट में केवल अस्पतालों के निर्माण पर ही नहीं, बल्कि परिणामों पर आधारित निवेश (Outcome-based Investment) और आधुनिक तकनीक के एकीकरण पर ध्यान देना होगा।

बुनियादी ढांचे और तकनीक का विस्तार

प्रकाश अस्पताल के कार्यकारी निदेशक आयुष चौहान के अनुसार, बड़े शहरों के अस्पतालों पर बढ़ते बोझ को कम करने के लिए जिला अस्पतालों और ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों को आधुनिक बनाना अनिवार्य है। बजट में मोबाइल वैन, डिजिटल डायग्नोस्टिक्स और टेलीमेडिसिन (Telemedicine Growth in India) के लिए विशेष आवंटन की उम्मीद की जा रही है। स्वास्थ्य सेवा अब केवल एक सामाजिक दायित्व नहीं, बल्कि एक रणनीतिक आर्थिक आवश्यकता बन चुकी है जो राष्ट्रीय उत्पादकता और रोजगार से सीधे जुड़ी है।

घरेलू चिकित्सा उपकरण (MedTech) को प्रोत्साहन

एसोसिएशन ऑफ इंडियन मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्री (AiMed) के निदेशक राजीव नाथ ने मांग की है कि चिकित्सा उपकरणों के आयात पर निर्भरता कम करने के लिए सीमा शुल्क को मौजूदा 7.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 10-15 प्रतिशत किया जाए। बजट में 'मेक इन इंडिया' के तहत आईसीएमईडी (ICMED) प्रमाणित उपकरणों को प्राथमिकता देने और एमएसएमई (MSME) की भागीदारी बढ़ाने के लिए नियामक स्पष्टता की आवश्यकता है।

गैर-संचारी रोगों (NCDs) की चुनौती

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, भारत में 63 प्रतिशत मौतें कैंसर, मधुमेह और हृदय रोगों जैसे गैर-संचारी रोगों के कारण होती हैं। विशेषज्ञों की राय है कि बजट 2026 में इन बीमारियों की समय पर जांच और रोकथाम के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम (NP-NCD) के तहत फंडिंग में कम से कम 30 प्रतिशत की वृद्धि की जानी चाहिए।

बजट 2026 की प्रमुख उम्मीदें एक नज़र में:

| क्षेत्र | मुख्य अपेक्षा |

| जीडीपी हिस्सा | स्वास्थ्य खर्च को GDP के 2.5% तक ले जाने का लक्ष्य। |

| मेडटेक | चिकित्सा उपकरणों के स्वदेशी निर्माण के लिए R&D फंड। |

| बीमा | आयुष्मान भारत के दायरे का विस्तार और मध्यम वर्ग के लिए राहत। |

| डिजिटल हेल्थ | एआई (AI) और रोबोटिक सर्जरी तकनीक का छोटे शहरों तक विस्तार। |



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