लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 'क्लीन एनर्जी' और 'ग्रीन ट्रांसपोर्ट' विजन के तहत उत्तर प्रदेश ने इलेक्ट्रिक वाहन (EV) इंफ्रास्ट्रक्चर में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। पिछले पांच वर्षों में राज्यभर में 2,316 इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए गए हैं, जो प्रदेश को हरित परिवहन के क्षेत्र में अग्रणी राज्यों की श्रेणी में खड़ा करते हैं। वर्तमान में देश में कुल 29,151 चार्जिंग स्टेशन हैं, जिनमें उत्तर प्रदेश का योगदान काफी महत्वपूर्ण है। राज्य के इस नेटवर्क में 540 फास्ट चार्जर और 1,776 स्लो चार्जर शामिल हैं, जो शहरी और अर्ध-शहरी दोनों क्षेत्रों की जरूरतों को संतुलित तरीके से पूरा कर रहे हैं। याहवी ग्रुप के सीईओ संदीप यादव ने बताया कि मथुरा और वृंदावन जैसे धार्मिक स्थलों पर ट्रकों के लिए विशेष ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए गए हैं।
The Yogi government has introduced India's most attractive incentive model for EV infrastructure, offering a capital subsidy of 20% (up to ₹10 lakh per unit) for the first 2,000 charging stations. उत्तर प्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है जिसने चार्जिंग स्टेशनों की 'अपस्ट्रीम इंफ्रास्ट्रक्चर' लागत (बिजली कनेक्शन और ट्रांसफॉर्मर खर्च) को भी सब्सिडी के दायरे में शामिल किया है। इससे पहले निवेशकों के लिए ₹25 लाख की न्यूनतम निवेश सीमा को पूरा करना एक बड़ी चुनौती थी, जिसे अब नीति में बदलाव कर आसान बना दिया गया है। लखनऊ, नोएडा, गाजियाबाद, कानपुर और वाराणसी जैसे शहरों के अलावा, सरकार अब पूर्वांचल और बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे पर 12 आधुनिक 'ई-वे हब' विकसित कर रही है, जहाँ चार्जिंग स्टेशनों के साथ होटल और फूड कोर्ट जैसी सुविधाएं मिलेंगी।
The state is also leveraging the central government's PM E-DRIVE scheme, which has a massive ₹2,000 crore allocation for charging infrastructure expansion nationwide. विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 के अंत तक उत्तर प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या में जबरदस्त उछाल आएगा, जिसे देखते हुए सरकार अब बस अड्डों, रेलवे स्टेशनों और औद्योगिक क्षेत्रों में पीपीपी (PPP) मॉडल के तहत नेटवर्क का विस्तार कर रही है। नगर निगमों को निर्देश दिए गए हैं कि वे चार्जिंग स्टेशन के लिए जमीन उपलब्ध कराएं और बिजली कनेक्शन में सहायता करें, जिसके बदले वे प्रति किलोवाट ₹1 की राजस्व हिस्सेदारी लेंगे। यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण में मदद करेगी बल्कि राज्य में नए आर्थिक अवसर और रोजगार भी पैदा करेगी।