देहरादून: उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) कानून के लागू होने के एक वर्ष पूर्ण होने पर मंगलवार को प्रदेश भर में 'समान नागरिक संहिता दिवस' मनाया गया। इस ऐतिहासिक अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य की जनता को बधाई देते हुए कहा कि यह कानून केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि समाज में समानता, पारदर्शिता और समरसता स्थापित करने की दिशा में एक सशक्त कदम है। प्रधानमंत्री मोदी की प्रेरणा से लागू हुई यह व्यवस्था विवाह, तलाक, संपत्ति और उत्तराधिकार जैसे संवेदनशील विषयों में महिलाओं के साथ होने वाले हर प्रकार के भेदभाव को समाप्त कर उन्हें न्यायसंगत अधिकार सुनिश्चित करती है। The Uniform Civil Code in Uttarakhand is being hailed as a landmark initiative for ensuring gender justice and legal uniformity across the state.
मुख्यमंत्री धामी ने सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी दी कि पिछले एक साल में यूसीसी के अंतर्गत नागरिक सेवाओं और विवाह पंजीकरण की प्रक्रिया में अभूतपूर्व तेजी आई है। राज्य सरकार ने आम नागरिकों की सुविधा के लिए 23 भाषाओं में सहायता और AI-आधारित सपोर्ट सिस्टम भी विकसित किया है, ताकि हर व्यक्ति इस कानून की बारीकियों को आसानी से समझ सके। सीएम ने स्पष्ट किया कि इस व्यवस्था का मूल लक्ष्य महिलाओं को उनके वैधानिक अधिकारों में पूर्ण समानता दिलाना है। This AI-driven support ensures that the Legal Framework is accessible to every citizen, regardless of their linguistic background.
इसी विशेष अवसर के बीच, उत्तराखंड सरकार ने यूसीसी कानून में कुछ महत्वपूर्ण संशोधन भी किए हैं। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने समान नागरिक संहिता (संशोधन) अध्यादेश-2026 को मंजूरी दे दी है। इस नए संशोधन के तहत अब पुरानी आपराधिक प्रक्रियाओं के स्थान पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 और भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 के प्रावधान लागू होंगे। इसके अलावा, लिव-इन संबंधों की समाप्ति पर अब पंजीयक द्वारा आधिकारिक प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा और विवाह के समय गलत जानकारी देने को अब शादी निरस्त करने का आधार माना जाएगा। The latest Legislative Amendments aim to strengthen the punitive measures against fraud in live-in relationships and marriages while streamlining administrative procedures.