दावोस में एआई पर विशेषज्ञों का भरोसा: 'मशीनें नौकरियां नहीं छीनेंगी, बल्कि काम को आसान बनाएंगी'


दावोस/नई दिल्ली: स्विट्जरलैंड के दावोस में चल रहे विश्व आर्थिक मंच (WEF) 2026 के शिखर सम्मेलन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और रोजगार के भविष्य को लेकर चल रही बहस पर विशेषज्ञों ने एक सकारात्मक रुख अपनाया है। तकनीकी जगत के दिग्गजों ने स्पष्ट किया कि एआई इंसानों की जगह नहीं लेगा, बल्कि उनकी क्षमता को कई गुना बढ़ाने में सहायक होगा। वर्करा के संस्थापक और सीईओ कियान कटानफोरूश ने इस चर्चा में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि वे एआई को 'सहकर्मी' कहना पसंद नहीं करते, क्योंकि एआई केवल विशिष्ट कार्यों में दक्ष है, जबकि इंसान एक साथ सैकड़ों विविध जिम्मेदारियां निभाने में सक्षम है। उनके अनुसार, अब तक की वे सभी भविष्यवाणियां गलत साबित हुई हैं जिनमें एआई द्वारा बड़े पैमाने पर नौकरियां खत्म होने का दावा किया गया था।

हिप्पोक्रेटिक एआई के सह-संस्थापक और सीईओ मुंजाल शाह ने भविष्य की एक अनूठी तस्वीर पेश करते हुए कहा कि आने वाले समय में दुनिया में "8 अरब लोग और 80 अरब एआई सिस्टम" होंगे। उन्होंने स्वास्थ्य सेवा का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे एआई ने गर्मी की लहर के दौरान हजारों लोगों को व्यक्तिगत रूप से फोन कर सुरक्षा संबंधी सलाह दी, जो बिना तकनीक के संभव नहीं था। मुंजाल शाह (Munjal Shah Hippocratic AI) ने जोर दिया कि एआई कर्मचारियों की जगह लेने के बजाय नए उपयोग के मामलों (Use Cases) को जन्म देगा, जिससे कार्यक्षमता में वृद्धि होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक 'नौकरी छीनने वाली' नहीं बल्कि 'नौकरी को नया रूप देने वाली' (Reshaping) साबित होगी।

सम्मेलन में अन्य वैश्विक नेताओं ने भी इस विचार का समर्थन किया। अमिनी की सीईओ केट कैलॉट ने एआई को एक 'उपकरण' मात्र बताया जिसमें मानवीय मूल्यों और निर्णय लेने की क्षमता का अभाव है। वहीं, बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (BCG) के सीईओ क्रिस्टोफ श्वाइजर ने तर्क दिया कि किसी कंपनी की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह तकनीक के साथ-साथ अपने संगठनात्मक ढांचे को कैसे बदलती है। एचपी के सीईओ एनरिक लोरस ने कॉल सेंटरों में एआई के संतुलित उपयोग की प्रशंसा करते हुए कहा कि इससे ग्राहक संतुष्टि और सटीकता दोनों में सुधार हुआ है। डब्ल्यूईएफ 2026 (WEF 2026 AI and Jobs) का यह निष्कर्ष स्पष्ट संदेश देता है कि एआई से डरने की नहीं, बल्कि इसे कौशल विकास (Reskilling) के साथ अपनाने की आवश्यकता है।



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