बलूचिस्तान: पाकिस्तान का बलूचिस्तान प्रांत इन दिनों सुलग रहा है, लेकिन इस बार विद्रोह का चेहरा बदल चुका है। बलूच विद्रोहियों ने प्रांत के 12 अलग-अलग स्थानों पर सुरक्षा बलों और पुलिस को निशाना बनाकर भीषण हमले किए, जिनमें कम से कम 10 सुरक्षाकर्मी मारे गए। इन हमलों के बीच सबसे चौंकाने वाली बात Balochistan Liberation Army (BLA) द्वारा जारी की गई तस्वीरें हैं, जिनमें महिला लड़ाके हाथों में AK-47 थामे नजर आ रही हैं। सशस्त्र उग्रवाद, जिसे अब तक पुरुष-प्रधान माना जाता था, उसमें महिलाओं की इस सक्रिय भागीदारी ने पाकिस्तानी सेना की नींद उड़ा दी है।
राजनीतिक विश्लेषक आयशा सिद्दीका के अनुसार, विद्रोह में महिलाओं का इस तरह सामने आना समाज के भीतर गहरे गुस्से और टूटते सामाजिक ढांचे का संकेत है। पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा की जा रही 'जबरन गुमशुदगी' (Enforced Disappearances) और मानवाधिकारों के हनन ने स्थानीय महिलाओं को घर की दहलीज लांघकर हथियार उठाने पर मजबूर कर दिया है। बीएलए ने हाल ही में 24 वर्षीय आसिफा मेंगल की पहचान एक फिदायीन हमलावर के रूप में जाहिर की है, जिसने सुरक्षा प्रतिष्ठानों पर आत्मघाती हमले को अंजाम दिया।
विशेषज्ञों का मानना है कि बलूच आंदोलन का नेतृत्व अब जनजातीय सरदारों के हाथों से निकलकर शिक्षित मध्यम वर्ग और महिलाओं के पास जा रहा है। 'वॉइस फॉर बलूच मिसिंग पर्सन्स' के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2000 के बाद से 5000 से अधिक पुरुष लापता हुए हैं। ऐसे में परिवारों की कमान संभाल रही महिलाओं ने अब राजनीतिक और सशस्त्र प्रतिरोध का रास्ता चुन लिया है। सामरिक मामलों के जानकार ब्रह्मा चेलानी का कहना है कि यह बदलाव बलूच समाज में व्याप्त हताशा और पाकिस्तानी हुकूमत के प्रति चरम अविश्वास को दर्शाता है।
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भी स्वीकार किया है कि हालिया हमलों में महिला उग्रवादियों की भूमिका निर्णायक रही है। साल 2024 और 2025 में बलूचिस्तान में हिंसा की घटनाओं में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सुरक्षा आंकड़ों के अनुसार, 2011 से अब तक इन संघर्षों में 350 से अधिक लोग जान गंवा चुके हैं। पाकिस्तान के लिए यह न केवल एक आंतरिक सुरक्षा चुनौती है, बल्कि एक गंभीर राजनीतिक संकट भी है, क्योंकि अब युद्ध के मैदान में महिलाएं सीधे तौर पर मोर्चा संभाल रही हैं।