जयपुर/चंडीगढ़: राजस्थान की प्यास बुझाने के लिए यमुना का पानी लाने की दशकों पुरानी मुहिम को एक ऐतिहासिक सफलता मिली है। हरियाणा सरकार ने हथिनी कुंड से राजस्थान के हासियावास (चूरू) तक बिछाई जाने वाली पाइपलाइन के एलाइनमेंट पर अपनी लिखित सहमति का पत्र राजस्थान सरकार को भेज दिया है। इस महत्वपूर्ण प्रगति के बाद अब परियोजना की DPR (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार करने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। गौरतलब है कि 12 मई 1994 को राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और हिमाचल प्रदेश के बीच हुए यमुना जल समझौते के बाद से ही यह मामला अधर में लटका हुआ था, जिसे अब मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के प्रयासों से गति मिली है।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत हरियाणा के यमुनानगर स्थित Hathni Kund Barrage से चूरू के हासियावास तक 265 किलोमीटर लंबी तीन समानांतर पाइपलाइन बिछाई जाएंगी। इसके माध्यम से राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र के जिलों—चूरू, सीकर और झुंझुनूं को मानसून अवधि के दौरान 577 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी प्राप्त होगा। हरियाणा के सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग ने पाइपलाइन के रास्ते पर अपनी मुहर लगा दी है, हालांकि हरियाणा ने बीच में कुछ स्थानों पर अपने पेयजल संकट को देखते हुए पानी की हिस्सेदारी भी मांगी है। 1994 के समझौते के अनुसार राजस्थान को आवंटित 1,917 क्यूसेक जल का लाभ अब तीन दशक बाद धरातल पर उतरता दिखाई दे रहा है।
फरवरी 2024 में दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों के बीच हुए नए MoU के बाद इस दिशा में तेजी से काम शुरू हुआ है। इससे पहले 2017 और 2021 में राजस्थान के कई प्रस्तावों को हरियाणा ने तकनीकी आधार पर अस्वीकार कर दिया था, क्योंकि राजस्थान खुली नहर के बजाय पाइपलाइन के जरिए पानी चाहता था ताकि पानी की बर्बादी रोकी जा सके। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की मौजूदगी में पिछले महीने हुई उच्च स्तरीय बैठक में पाइपलाइन एलाइनमेंट पर सैद्धांतिक सहमति बनी थी, जिसे अब आधिकारिक रूप दे दिया गया है। इस परियोजना के पूरा होने से राजस्थान के मरूस्थलीय इलाकों में पेयजल और सिंचाई की समस्या का स्थाई समाधान होने की उम्मीद है।