नई दिल्ली: देश के प्रमुख शहरों, विशेषकर Delhi-NCR के रियल एस्टेट मार्केट से घर खरीदारों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आ रही है। पिछले कुछ वर्षों से रॉकेट की रफ्तार से बढ़ रही आवासीय संपत्तियों की कीमतों पर अब लगाम लगती दिख रही है। रियल एस्टेट सलाहकार कंपनी 'प्रॉपटाइगर' (PropTiger) द्वारा जारी 'रियल इनसाइट रेजिडेंशियल 2025' रिपोर्ट के अनुसार, साल 2025 में घरों की कीमतों में बढ़ोतरी की रफ्तार काफी धीमी रही है। आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली-एनसीआर में जहां साल 2024 में कीमतें 49 प्रतिशत की दर से बढ़ी थीं, वहीं 2025 में यह वृद्धि महज 6 प्रतिशत पर सिमट गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि 2022 से 2024 के बीच कीमतों में हुई बेतहाशा बढ़ोतरी के कारण अब मांग (Demand) में 'नॉर्मलाइजेशन' यानी सामान्यीकरण का दौर शुरू हो गया है। औरम प्रॉपटेक के कार्यकारी निदेशक ओंकार शेट्ये के अनुसार, बिक्री में 12 प्रतिशत की गिरावट के बावजूद कीमतों का स्थिर रहना एक 'अनुशासित बाजार' का संकेत है। डेवलपर्स अब इन्वेंट्री प्रबंधन पर अधिक ध्यान दे रहे हैं, जिससे 2026 के लिए एक स्थिर आधार तैयार हुआ है।
प्रमुख शहरों में कीमतों का रुझान (2025):
देश के टॉप-8 शहरों में औसत आवास कीमतों की वार्षिक वृद्धि 2024 के 17% के मुकाबले 2025 में गिरकर औसतन 6% रह गई है। यहाँ विभिन्न शहरों का तुलनात्मक विवरण दिया गया है:
| शहर | 2025 में वृद्धि | औसत कीमत (प्रति वर्ग फुट) |
| बेंगलुरु | 13% (सर्वाधिक) | ₹8,533 |
| हैदराबाद | 8% | ₹7,644 |
| अहमदाबाद | 8% | ₹4,754 |
| दिल्ली-NCR | 6% | ₹8,570 |
| कोलकाता | 6% | ₹5,945 |
| मुंबई (MMR) | 4% | ₹13,164 |
| पुणे | 1% | ₹7,192 |
| चेन्नई | 0% (स्थिर) | ₹7,200 |
रिपोर्ट के अनुसार, Bengaluru अब दिल्ली-एनसीआर को पछाड़कर देश का दूसरा सबसे महंगा आवासीय बाजार बन गया है। टेक हब होने के कारण यहाँ वास्तविक खरीदारों की मांग अभी भी बनी हुई है। वहीं, Ahmedabad अपनी किफायती कीमतों के कारण मध्यम वर्ग की पहली पसंद बना हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि कीमतों में आई यह सुस्ती मध्यम अवधि में बाजार के लिए स्वास्थ्यवर्धक साबित होगी, क्योंकि इससे वास्तविक खरीदारों (End-users) को दोबारा बाजार में लौटने का मौका मिलेगा।