लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर 'जातिवादी' हमला: दिल्ली यूनिवर्सिटी में महिला पत्रकार से बर्बरता, नग्न परेड और रेप की धमकी से सहमी रुचि तिवारी



नई दिल्ली: दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) का आर्ट्स फैकल्टी परिसर शुक्रवार को उस समय रणक्षेत्र में तब्दील हो गया, जब यूजीसी के समर्थन में आयोजित एक विरोध प्रदर्शन के दौरान एक महिला पत्रकार के साथ भीषण बदसलूकी और मारपीट की गई। यूट्यूब चैनल 'ब्रेकिंग ओपिनियन' से जुड़ी पत्रकार रुचि तिवारी ने अपनी आपबीती सुनाते हुए आरोप लगाया कि केवल उनके ब्राह्मण होने की वजह से उन पर 500 से अधिक लोगों की भीड़ ने हमला किया। रुचि का दावा है कि प्रदर्शनकारियों ने उन्हें घेरकर न केवल शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया, बल्कि उन्हें 'नग्न परेड' निकालने और बलात्कार करने की भयावह धमकियां भी दीं।

रुचि तिवारी के अनुसार, घटना की शुरुआत तब हुई जब भीड़ में से किसी ने उनकी जाति पूछी। जैसे ही उन्होंने अपना पूरा नाम बताया, भीड़ 'ब्राह्मणवाद' के खिलाफ नारे लगाने लगी और उन्हें चारों तरफ से घेर लिया। पत्रकार ने आरोप लगाया कि वहां मौजूद पुलिस बल मूकदर्शक बना रहा, जबकि कुछ लड़कियों ने उनकी गर्दन पकड़ रखी थी और उनके कानों में अत्यंत आपत्तिजनक और डरावनी धमकियां दे रही थीं। इस हमले के दौरान रुचि बेहोश हो गई थीं और कुछ लॉ फैकल्टी के सदस्यों की मानवीय मदद से ही उनकी जान बच सकी।

एबीवीपी और आईसा के बीच छिड़ा 'वीडियो' युद्ध

इस घटना के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय में राजनीतिक तापमान चरम पर है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने इस हमले के लिए वामपंथी छात्र संगठनों (AISA/SFI) को जिम्मेदार ठहराते हुए इसे प्रेस की आजादी पर हमला बताया है। एबीवीपी के दिल्ली प्रदेश मंत्री सार्थक शर्मा ने कहा कि लेफ्ट विंग की राजनीति हमेशा हिंसा पर आधारित रही है और एक महिला पत्रकार के साथ ऐसी कायरतापूर्ण हरकत उनकी असली मानसिकता को उजागर करती है।

दूसरी ओर, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए दावा किया कि उन्होंने पत्रकार को भीड़ से बचाने की कोशिश की थी। उन्होंने इस घटना के पीछे 'राइट विंग' समूहों का हाथ होने का आरोप लगाया है। हालांकि, सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में भीड़ को उग्र नारे लगाते और युवती को आतंकित करते हुए साफ देखा जा सकता है।

चश्मदीदों का बयान और पुलिसिया कार्रवाई

घटना के चश्मदीद छात्र आकाश पाठक ने बताया कि हमलावर छात्र नहीं बल्कि 'गुंडे' लग रहे थे, जो जाति के आधार पर नफरत फैला रहे थे। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली है और वायरल वीडियो के आधार पर आरोपियों की पहचान की जा रही है। इस घटना ने विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों और पत्रकारों की सुरक्षा पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं।


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