ढाका/नई दिल्ली: बांग्लादेश के राजनीतिक इतिहास में 12 फरवरी 2026 की तारीख एक बड़े बदलाव के रूप में दर्ज हो गई है। लगभग दो दशक के लंबे इंतजार और 2024 के ऐतिहासिक जन-आंदोलन के बाद, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने संसदीय चुनावों में दो-तिहाई बहुमत के साथ सत्ता में शानदार वापसी की है। इस ऐतिहासिक जीत के बाद, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) और भावी प्रधानमंत्री तारिक रहमान (Tarique Rahman) के बीच हुई बातचीत ने दोनों देशों के भविष्य के रिश्तों को लेकर एक सकारात्मक और नई दिशा तय की है।
प्रधानमंत्री मोदी ने तारिक रहमान को फोन कर 'प्रेसिडेंशियल' जीत की बधाई दी और एक लोकतांत्रिक, समावेशी और प्रगतिशील बांग्लादेश के प्रति भारत के अटूट समर्थन को दोहराया। इसके जवाब में, BNP ने सार्वजनिक रूप से पीएम मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे भारत के साथ 'पारस्परिक सम्मान' और 'एक-दूसरे की चिंताओं के प्रति संवेदनशीलता' के आधार पर काम करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। पार्टी ने इसे दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय शांति और स्थिरता की दिशा में एक 'रचनात्मक शुरुआत' करार दिया है।
बांग्लादेश चुनाव 2026: मुख्य परिणाम और समीकरण
300 सीटों वाली संसद (जातीय संसद) में BNP और उसके सहयोगियों ने 212 से अधिक सीटों पर जीत दर्ज की है। इस चुनाव की कुछ प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
ऐतिहासिक वापसी: BNP ने 20 साल बाद ढाका की सत्ता की चाबी हासिल की है।
विपक्ष का स्वरूप: जमात-ए-इस्लामी और उसके सहयोगियों ने लगभग 76 सीटें जीतकर मुख्य विपक्षी दल की भूमिका हासिल की है।
जुलाई चार्टर: चुनाव के साथ-साथ 'जुलाई नेशनल चार्टर' पर जनमत संग्रह (Referendum) भी हुआ, जिसे जनता का भारी समर्थन मिला है।
अल्पसंख्यक सुरक्षा: जीत के बाद तारिक रहमान ने सभी नागरिकों, विशेषकर अल्पसंख्यकों के लिए समान न्याय और सुरक्षा का वादा किया है।
यह चुनाव शेख हसीना (Sheikh Hasina) के 15 साल के शासन के अंत के बाद पहला लोकतांत्रिक अभ्यास था। जानकारों का मानना है कि भारत का त्वरित और सकारात्मक रुख यह दर्शाता है कि नई दिल्ली बदलती राजनीतिक परिस्थितियों में अपने सबसे महत्वपूर्ण पड़ोसी के साथ 'बहुआयामी संबंधों' को और मजबूत करना चाहती है। आने वाले समय में कनेक्टिविटी, व्यापार और सीमा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर दोनों देशों के बीच उच्च-स्तरीय वार्ताएं होने की उम्मीद है।