नई दिल्ली: भारत की रक्षा क्षमताओं को नई ऊंचाइयों पर ले जाते हुए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। मंगलवार सुबह ओडिशा के चांदीपुर तट स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज से 'सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट' (Solid Fuel Ducted Ramjet) तकनीक का सफल परीक्षण किया गया। इस अत्याधुनिक तकनीक के सफल होने से अब भारत लंबी दूरी तक हवा से हवा में मार करने वाली (Air-to-Air) मिसाइलें विकसित करने में सक्षम हो गया है। इस परीक्षण के साथ ही भारत दुनिया के उन चुनिंदा शक्तिशाली देशों की फेहरिस्त में शामिल हो गया है जिनके पास रैमजेट जैसी जटिल और उन्नत एयरोस्पेस तकनीक मौजूद है।
डीआरडीओ के वैज्ञानिकों के अनुसार, परीक्षण सुबह करीब 10.45 बजे किया गया। मिसाइल को पहले बूस्टर इंजन की मदद से सुपरसोनिक रफ्तार दी गई, जिसके बाद 'बिना नोजल वाले बूस्टर' और Fuel Flow Control System ने सटीकता के साथ काम किया। पूरी उड़ान के दौरान बंगाल की खाड़ी के किनारे तैनात रडार और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल ट्रैकिंग सिस्टम के जरिए आंकड़ों पर नजर रखी गई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और डीआरडीओ प्रमुख डॉ. समीर वी. कामत ने इस सफलता के लिए पूरी टीम को बधाई देते हुए इसे 'आत्मनिर्भर भारत' की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम बताया है।
गौरतलब है कि यह कामयाबी भारत के हाइपरसोनिक मिसाइल कार्यक्रम को भी गति प्रदान करेगी। इससे पहले 9 जनवरी को हैदराबाद स्थित DRDL प्रयोगशाला में स्क्रैमजेट तकनीक का सफल परीक्षण किया गया था, जिसने 12 मिनट तक स्थिर संचालन का प्रदर्शन किया। सॉलिड फ्यूल रैमजेट तकनीक की मदद से मिसाइलें ध्वनि की गति से कई गुना तेज रफ्तार हासिल कर सकती हैं, जिससे दुश्मन के लड़ाकू विमानों और मिसाइल डिफेंस सिस्टम के लिए इन्हें रोकना नामुमकिन हो जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस नई तकनीक का इस्तेमाल भविष्य की 'अस्त्र' (Astra Missile) जैसी मिसाइलों के उन्नत संस्करणों में किया जाएगा, जिससे भारतीय वायुसेना की मारक क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी। यह सफलता न केवल रक्षा क्षेत्र में भारत के बढ़ते कदम को दर्शाती है, बल्कि वैश्विक स्तर पर एयरोस्पेस क्षमताओं में भारत के प्रभुत्व को भी स्थापित करती है। आने वाले समय में यह तकनीक लंबी दूरी की रणनीतिक मिसाइलों के विकास के लिए आधार का काम करेगी।