वर्दी की मर्यादा और राष्ट्रीय सुरक्षा: पूर्व DGP एसपी वैद ने जनरल नरवणे को दी नसीहत, राहुल गांधी के दावों पर मचा बवाल


नई दिल्ली: भारतीय राजनीति और सुरक्षा गलियारों में पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण (Memoir) को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा इस किताब के अंशों का हवाला देकर चीन के मुद्दे पर सरकार को घेरने के बाद, जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी एसपी वैद (SP Vaid) ने जनरल नरवणे को कड़ी नसीहत दी है। वैद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि वर्दीधारी अधिकारियों के पास मौजूद संवेदनशील जानकारियां अक्सर उनके साथ कब्र तक ही जानी चाहिए। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि हर वर्दीधारी इस तरह बोलने लगा, तो सरकारें कांप उठेंगी।

यह विवाद तब और गहरा गया जब राहुल गांधी ने सदन में जनरल नरवणे की किताब पर आधारित लेख को पटल पर रखने और उसे सत्यापित करने की मांग की। कांग्रेस नेता ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा एक अत्यंत गंभीर मुद्दा बताया, जो चीन और पाकिस्तान के साथ भारत के संबंधों को प्रभावित करता है। इसके जवाब में संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने व्यवस्था का हवाला देते हुए राहुल गांधी के दावों का विरोध किया, जिससे सदन में भारी हंगामा और High-Voltage Drama देखने को मिला।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी इस मुद्दे पर मोदी सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर पूर्व सेना प्रमुख की किताब में ऐसा क्या छिपा है, जिससे सरकार के बड़े-बड़े मंत्री घबरा रहे हैं और इसे प्रकाशित होने से रोका जा रहा है। खरगे ने आरोप लगाया कि भाजपा का राष्ट्रवाद केवल बातों तक सीमित है और 2020 के गलवान संघर्ष (Galwan Clash) के बाद चीन को दी गई 'क्लीन चिट' देश की सुरक्षा के साथ समझौता थी। विपक्ष का तर्क है कि लोकतंत्र में राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़े तथ्यों पर देश को विश्वास में लिया जाना अनिवार्य है।

वर्तमान में यह मामला 'अभिव्यक्ति की आजादी' और 'राष्ट्रीय गोपनीयता' के बीच एक बड़ी बहस का रूप ले चुका है। National Security के संवेदनशील डेटा और सैन्य अभियानों की आंतरिक जानकारी को सार्वजनिक करने की सीमाओं पर रक्षा विशेषज्ञ भी अलग-अलग राय रख रहे हैं। सरकार की ओर से अभी तक पुस्तक के प्रकाशन को रोकने के आधिकारिक कारणों पर कोई विस्तृत बयान नहीं आया है, जिससे संशय और बढ़ गया है।



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