शिमला: हिमाचल प्रदेश में रेलवे परियोजनाओं और बुनियादी ढांचे के विकास को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर (Jairam Thakur) ने प्रदेश की सुक्खू सरकार पर केंद्र के सहयोग के बावजूद रेलवे विस्तार में अड़ंगा लगाने का गंभीर आरोप लगाया है। शिमला से जारी बयान में जयराम ने कहा कि हिमाचल के लिए प्रधानमंत्री ने 2911 Crore Rupees का ऐतिहासिक बजट जारी किया है, जो यूपीए सरकार की तुलना में 27 गुना अधिक है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार अपने हिस्से का काम समय पर पूरा नहीं कर रही है, जिससे परियोजनाओं की लागत बढ़ रही है और रेल नेटवर्क का सपना लटक रहा है।
जयराम ठाकुर ने पंचायत चुनावों के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने सवाल उठाया कि उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद 12 में से 10 जिलों में अभी तक मतदाता सूची का प्रकाशन क्यों नहीं हुआ? उन्होंने इसे संवैधानिक अधिकारों का हनन बताते हुए मुख्यमंत्री से स्पष्टीकरण मांगा है। साथ ही, जयराम ने अमेरिका द्वारा भारत पर टैरिफ घटाकर 18% करने के फैसले को पीएम मोदी की बड़ी कूटनीतिक जीत करार दिया और कहा कि इससे 'मेड इन इंडिया' उत्पादों को वैश्विक स्तर पर मजबूती मिलेगी।
दूसरी ओर, लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह (Vikramaditya Singh) ने सड़कों की मजबूती को लेकर सरकार की नई कार्ययोजना साझा की है। उन्होंने बताया कि हिमाचल की सड़कों को मानसून के दौरान होने वाले भारी नुकसान से बचाने के लिए नई 'रोड ड्रेनेज नीति' (Road Drainage Policy) का ड्राफ्ट आगामी कैबिनेट बैठक में मंजूरी के लिए रखा जाएगा। मंत्री ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2025 में सड़कों को करीब 3,000 करोड़ रुपये की क्षति हुई, जिसका मुख्य कारण खराब जल निकासी और ढलानों की अस्थिरता रही।
नई नीति के तहत ड्रेनेज को अब सड़क निर्माण का मुख्य इंजीनियरिंग हिस्सा माना जाएगा और इसके लिए 'रोड ड्रेनेज' नाम से एक अलग बजट हेड प्रस्तावित किया गया है। विक्रमादित्य सिंह ने चेतावनी दी कि सड़क की नालियों में अवैध सीवरेज या कचरा डालने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि सड़कों का डिजाइन वास्तविक वर्षा आंकड़ों (Rainfall Data) के आधार पर तैयार किया जाए ताकि वे लंबे समय तक टिकाऊ रह सकें।
जहां विपक्ष केंद्र की योजनाओं को लागू न करने का आरोप लगा रहा है, वहीं सरकार नई नीतियों के जरिए आपदा से निपटने और बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने का दावा कर रही है। अब देखना यह है कि कैबिनेट में इस नई ड्रेनेज नीति को मंजूरी मिलने के बाद धरातल पर सड़कों की स्थिति में कितना सुधार आता है।