शिमला/ऊना: हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू (CM Sukhvinder Singh Sukhu) ने केंद्र सरकार द्वारा राजस्व घाटा अनुदान (Revenue Deficit Grant - RDG) बंद किए जाने के फैसले पर कड़ी नाराजगी जताई है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि 16वें वित्त आयोग का यह निर्णय पहाड़ी राज्यों के लिए 'घातक' साबित होगा और इससे हिमाचल प्रदेश को लगभग 50,000 करोड़ रुपए का भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ेगा। गुरुवार को प्रदेश सचिवालय में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए विधायकों की प्राथमिकताओं को लेकर आयोजित बैठक में सुक्खू ने केंद्र पर 'सहकारी संघवाद' की भावना के विरुद्ध काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यह बजट हिमाचल जैसे आत्मनिर्भर बनने की कोशिश कर रहे राज्य को कर्ज के दलदल में धकेलने जैसा है।
मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार के आगामी बजट को 'मध्यम वर्ग और किसान विरोधी' करार दिया। उन्होंने तर्क दिया कि हिमाचल की अर्थव्यवस्था कृषि और बागवानी पर टिकी है, लेकिन बजट में बागवानों के लिए बुनियादी ढांचे और सब्सिडी की पूरी तरह अनदेखी की गई है। इसके अलावा, भानुपल्ली-बिलासपुर और चंडीगढ़-बद्दी जैसी महत्वपूर्ण रेल परियोजनाओं के लिए भी कोई ठोस घोषणा नहीं की गई। सुक्खू ने याद दिलाया कि हिमाचल पेड़ों के कटान पर प्रतिबंध लगाकर देश के पर्यावरण संरक्षण में बड़ी भूमिका निभा रहा है, ऐसे में आर्थिक मदद रोकना प्रदेश के साथ अन्याय है।
विधायकों की मांगें और नाबार्ड की योजनाएं
मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि सरकार ने वर्ष 2025-26 के लिए नाबार्ड (NABARD) से 713.87 करोड़ रुपए की 73 योजनाएं स्वीकृत करवाई हैं। बैठक के पहले सत्र में ऊना, हमीरपुर और सिरमौर जिलों के विधायकों ने अपनी प्राथमिकताएं रखीं:
| जिला | विधायक | प्रमुख मांगें/मुद्दे |
| ऊना | सुदर्शन बबलू (चिंतपूर्णी) | मंदिर विस्तार, स्तोथर पुल और सब फायर स्टेशन। |
| हमीरपुर | रणजीत सिंह (सुजानपुर) | टौणीदेवी अस्पताल में डॉक्टरों की नियुक्ति और सड़क सुधार। |
| सिरमौर | विनय कुमार (रेणुकाजी) | झील की सफाई, चिड़ियाघर में शेर लाना और ददाहू कॉलेज भवन। |
| ऊना | सतपाल सत्ती (ऊना) | नगर निगम में सीवरेज स्कीम और ड्रेनेज व्यवस्था। |
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बजट का पूर्ण उपयोग सुनिश्चित किया जाए और नाबार्ड के प्रतिपूर्ति दावे 15 मार्च से पहले जमा किए जाएं। उन्होंने विश्वास दिलाया कि केंद्र से मिलने वाली चुनौतियों के बावजूद, कुशल वित्तीय प्रबंधन के जरिए प्रदेश में विकास की गति को रुकने नहीं दिया जाएगा। सुक्खू ने केंद्र सरकार से मांग की कि विशेष भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए आरडीजी को तत्काल बहाल किया जाए और हिमाचल के लिए विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा की जाए।