जालंधर: पंजाब की न्यायपालिका ने कानून प्रवर्तन अधिकारियों की जवाबदेही तय करते हुए एक बड़ा कदम उठाया है। जालंधर की एक स्थानीय अदालत ने लुधियाना के वर्तमान पुलिस कमिश्नर (Police Commissioner) स्वपन शर्मा के खिलाफ ज़मानती वारंट जारी किए हैं। अदालत ने यह सख्त फैसला उन्हें बार-बार समन भेजे जाने के बावजूद व्यक्तिगत रूप से पेश न होने के कारण लिया है। माननीय अदालत ने निर्देश दिया है कि आईपीएस अधिकारी स्वपन शर्मा बुधवार को कोर्ट में पेश हों और 5,000 रुपये की ज़मानत राशि (Bail Bond) जमा करवाएं।
यह पूरा विवाद वर्ष 2024 के एक NDPS Act (नशीले पदार्थ अधिनियम) से जुड़े मामले से उत्पन्न हुआ है। जिस समय संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नशा तस्करी का केस दर्ज किया गया था, उस समय स्वपन शर्मा जालंधर के पुलिस कमिश्नर के पद पर तैनात थे। मामले की जांच प्रक्रिया और तथ्यों के सत्यापन के लिए अदालत उन्हें 'तत्कालीन जिम्मेदार अधिकारी' होने के नाते गवाही या स्पष्टीकरण के लिए बुला रही थी। लेकिन, कई तारीखों पर अनुपस्थित रहने को अदालत ने न्यायिक प्रक्रिया में बाधा माना।
अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार, स्वपन शर्मा को पेश होने के लिए कई बार औपचारिक समन जारी किए गए थे, लेकिन उनकी ओर से कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं दी गई। इसी हठधर्मिता को देखते हुए अदालत ने अब Bailable Warrant का सहारा लिया है। वर्तमान में स्वपन शर्मा लुधियाना जैसे महत्वपूर्ण औद्योगिक शहर के पुलिस प्रमुख की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, ऐसे में अदालत के इस आदेश ने प्रशासनिक गलियारों में खलबली मचा दी है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह वारंट एक रिमाइंडर है कि कानून की नज़र में कोई भी पद छोटा या बड़ा नहीं होता और अदालती आदेशों की पालना अनिवार्य है। अब सभी की निगाहें बुधवार की सुनवाई पर टिकी हैं कि क्या पुलिस कमिश्नर स्वयं पेश होकर अपना पक्ष रखते हैं या इस आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी जाती है। इस मामले ने जालंधर पुलिस द्वारा दर्ज किए गए पुराने एनडीपीएस मामलों की जांच की पारदर्शिता पर भी सवालिया निशान लगा दिए हैं।