मंडी में ब्यास महाआरती का दिव्य आगाज: 500वें साल में प्रवेश कर रही छोटी काशी, वाराणसी के पंडितों ने किया मंत्रोच्चारण



मंडी (हिमाचल प्रदेश): अंतर्राष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव-2026 के पावन अवसर पर 'छोटी काशी' के नाम से विख्यात मंडी नगर में एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक आयोजन का गवाह बना। ब्यास नदी के तट पर स्थित पौराणिक Panchvaktra Mahadev Temple के समीप भव्य 'ब्यास महाआरती' का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। इस भक्तिमय संध्या में प्रदेश के उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित रहे। उन्होंने विधि-विधान से मां ब्यास की पूजा-अर्चना की और हिमाचल प्रदेश की सुख-समृद्धि एवं शांति की कामना की। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि यह महाआरती क्षेत्र में नई ऊर्जा का संचार करेगी और भविष्य में मंडी की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी।

इस दिव्य महाआरती को भव्य बनाने के लिए विशेष रूप से Varanasi (Kashi) से 5 विद्वान पंडितों को बुलाया गया था। गंगा आरती की तर्ज पर वैदिक मंत्रोच्चारण और शंखनाद के बीच जब ब्यास तट दीपों की रोशनी से जगमगा उठा, तो पूरा वातावरण शिवमय हो गया। उपमुख्यमंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि ब्यास महाआरती को अब प्रतिवर्ष शिवरात्रि महोत्सव का अभिन्न हिस्सा बनाया जाएगा, ताकि पर्यटन और स्थानीय गौरव को बढ़ावा मिल सके।

मंडी नगर के लिए यह वर्ष और भी खास है क्योंकि यह अपनी स्थापना के 500वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि को यादगार बनाने के लिए महाआरती के पश्चात एक भव्य लेजर शो (Laser Show) का भी आयोजन किया गया। इस शो के माध्यम से मंडी के गौरवशाली इतिहास, वास्तुकला और इसकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक तकनीक के जरिए प्रदर्शित किया गया, जिसे देख वहां मौजूद जनसमूह मंत्रमुग्ध हो गया।

जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य देव संस्कृति को संरक्षण देना और युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ना है। International Shivratri Festival के दौरान ब्यास तट पर उमड़े इस जनसैलाब ने यह साबित कर दिया कि आधुनिकता के दौर में भी आस्था की लौ उतनी ही प्रज्वलित है। प्रशासन अब इस स्थान को एक प्रमुख 'स्पिरिचुअल टूरिज्म' केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना बना रहा है।


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