पटना: बिहार की राजधानी पटना सोमवार को एक बार फिर छात्र राजनीति और भारी विरोध प्रदर्शन का केंद्र बन गई। University Grants Commission (यूजीसी) द्वारा उच्च शिक्षण संस्थानों में एससी, एसटी और ओबीसी छात्र-छात्राओं के साथ होने वाले भेदभाव को रोकने के लिए लाए गए नए नियमों के समर्थन में हजारों छात्र सड़कों पर उतर आए। दरअसल, Supreme Court द्वारा इन नियमों के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगाए जाने के बाद से ही आरक्षित वर्ग के छात्रों में आक्रोश है। प्रदर्शनकारी छात्रों ने पटना कॉलेज से गांधी मैदान तक विशाल मार्च निकाला और केंद्र सरकार व यूजीसी से इन नियमों को तत्काल प्रभाव से लागू करने की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई जब पुलिस ने जेपी गोलंबर के पास बैरिकेडिंग कर छात्रों को रोकने की कोशिश की। छात्र नेताओं और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जो बाद में हिंसक झड़प में बदल गई। आक्रोशित छात्र बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे थे, जिसके जवाब में Patna Police ने बल प्रयोग किया। पुलिस ने मौके से दो प्रमुख छात्र नेताओं, अमर आजाद और मनीष यादव को हिरासत में ले लिया है और उन्हें कोतवाली थाने ले जाया गया है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए इलाके में भारी पुलिस बल और 'वाटर कैनन' (Water Cannon) की तैनाती की गई है।
पूरा विवाद यूजीसी के उन नए दिशा-निर्देशों को लेकर है, जिनका उद्देश्य कैंपस में सामाजिक समानता सुनिश्चित करना था। जहाँ एक वर्ग इन नियमों को संविधान की मूल भावना के अनुरूप बता रहा है, वहीं सवर्ण वर्ग के संगठनों ने इसे भेदभावपूर्ण बताते हुए शीर्ष अदालत में चुनौती दी थी। वर्तमान में मामला न्यायालय के विचाराधीन है और Supreme Court of India ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर इस पर जवाब मांगा है। पटना विश्वविद्यालय के विभिन्न हॉस्टलों से आए हजारों छात्रों के जुटने से शहर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।
छात्र संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि हिरासत में लिए गए नेताओं को तुरंत रिहा नहीं किया गया और समानता के इन नियमों को बहाल नहीं किया गया, तो वे राज्यव्यापी आंदोलन शुरू करेंगे। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर गांधी मैदान और अशोक राजपथ के आसपास के स्कूलों और कॉलेजों में सुरक्षा बढ़ा दी है। इस प्रदर्शन ने बिहार की सियासत में 'मंडल-कमंडल' की पुरानी बहस को एक बार फिर गरमा दिया है।