बीजिंग: तिब्बती आध्यात्मिक गुरु Dalai Lama को प्रतिष्ठित ग्रैमी पुरस्कार (Grammy Award) से सम्मानित किए जाने पर चीन बुरी तरह भड़क गया है। सोमवार को चीनी विदेश मंत्रालय ने इस सम्मान की तीखी निंदा करते हुए इसे "चीन विरोधी गतिविधियों" को बढ़ावा देने का एक औज़ार बताया। लॉस एंजिल्स में आयोजित 68th Annual Grammy Awards में दलाई लामा को उनके ऑडियो एल्बम 'मेडिटेशन्स: द रिफ्लेक्शंस ऑफ हिज होलीनेस द दलाई लामा' के लिए 'सर्वश्रेष्ठ ऑडियो बुक, कथावाचन और किस्सागोई' श्रेणी में विजेता घोषित किया गया। यह 90 वर्षीय आध्यात्मिक गुरु का पहला ग्रैमी सम्मान है।
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने बीजिंग में मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि दलाई लामा कोई विशुद्ध धार्मिक व्यक्ति नहीं हैं, बल्कि वे "धर्म की आड़ में चीन विरोधी अलगाववादी गतिविधियों" में शामिल एक राजनीतिक निर्वासित हैं। चीन ने अंतरराष्ट्रीय मंचों को चेतावनी देते हुए कहा कि वे इस पुरस्कार का उपयोग चीन की क्षेत्रीय अखंडता को नुकसान पहुँचाने के लिए न करें। गौरतलब है कि दलाई लामा 1959 से ही भारत के Dharamshala में निर्वासन में रह रहे हैं और उन्हें 1989 में नोबेल शांति पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।
इस सम्मान को प्राप्त करने के बाद दलाई लामा ने अत्यंत विनम्रता के साथ अपना संदेश जारी किया। उन्होंने कहा, "मैं इस पुरस्कार को व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि शांति, करुणा और मानवता की एकता के संदेश की वैश्विक मान्यता मानता हूँ।" उन्होंने उम्मीद जताई कि Grammy Recognition के माध्यम से करुणा और पर्यावरण देखभाल का उनका संदेश दुनिया के 8 अरब लोगों तक अधिक व्यापक रूप से पहुँच सकेगा। दलाई लामा ने इस श्रेणी में ट्रेवर नोआ और केतनजी ब्राउन जैक्सन जैसी बड़ी हस्तियों को पीछे छोड़ते हुए यह जीत हासिल की है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस पुरस्कार ने एक बार फिर तिब्बत के मुद्दे को वैश्विक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। जहाँ एक ओर दुनिया भर से उन्हें बधाई संदेश मिल रहे हैं, वहीं चीन की यह तीखी प्रतिक्रिया दोनों देशों के बीच पुराने कूटनीतिक तनाव को और हवा दे सकती है। Tibet की सांस्कृतिक पहचान और आध्यात्मिक संदेशों को वैश्विक मंच पर मिली इस पहचान को चीन अपने आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप के रूप में देख रहा है।