आबूरोड/सिरोही: संसद के ऊपरी सदन राज्यसभा (Rajya Sabha) में शून्यकाल के दौरान पत्रकारों के हितों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मुद्दा गरमाया। राजस्थान से सांसद नीरज डांगी ने देश के लोकतांत्रिक ढांचे के चौथे स्तंभ कहे जाने वाले पत्रकारों को मिलने वाली रेल यात्रा रियायतों (Railway Concessions) को पुनः बहाल करने की मांग उठाई है। सांसद डांगी ने सदन का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान रेल मंत्रालय ने इन सुविधाओं को अस्थायी रूप से स्थगित किया था, लेकिन अब जब देश में स्थितियां पूरी तरह सामान्य हो चुकी हैं, तो इन्हें अभी तक बहाल न करना अत्यंत खेदजनक है।
सांसद नीरज डांगी ने तर्क दिया कि पत्रकारिता केवल एक पेशा नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का एक साधन है। पत्रकार दुर्गम क्षेत्रों में जाकर आपदाओं, सामाजिक विसंगतियों और सरकारी योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन की निष्पक्ष रिपोर्टिंग करते हैं। अक्सर उन्हें सीमित संसाधनों और जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में कार्य करना पड़ता है। ऐसे में रेल यात्रा में मिलने वाली छूट कोई विशेषाधिकार नहीं, बल्कि उनके कर्तव्यों के निर्वहन में सहायक एक आवश्यक सुविधा है।
सांसद ने सदन में जोर देकर कहा कि पत्रकारों को इन रियायतों से वंचित रखना अप्रत्यक्ष रूप से उनकी कार्यक्षमता को बाधित करना है। इस निर्णय से विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के स्वतंत्र पत्रकार और क्षेत्रीय मीडिया कर्मी सर्वाधिक प्रभावित हुए हैं। उन्होंने सरकार से मांग की है कि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए मान्यता प्राप्त पत्रकारों के लिए एक स्पष्ट और स्थायी नीति बनाई जाए, ताकि भविष्य में किसी भी आपात स्थिति में उनकी सुविधाओं को बेवजह समाप्त न किया जा सके।
इस मुद्दे पर राज्यसभा में चर्चा के बाद अब गेंद रेल मंत्रालय (Ministry of Railways) के पाले में है। पत्रकार संगठनों ने भी सांसद डांगी की इस पहल का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि केंद्र सरकार इस जनहित के मुद्दे पर जल्द ही कोई सकारात्मक निर्णय लेगी। मान्यता प्राप्त पत्रकारों (Accredited Journalists) का कहना है कि यह सुविधा बहाल होने से डिजिटल और प्रिंट मीडिया दोनों के कार्यक्षेत्र में विस्तार होगा।