सुकमा (छत्तीसगढ़): छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में नक्सलियों के अभेद्य 'गढ़' माने जाने वाले गोगुंडा इलाके में सुरक्षाबलों ने माओवादियों की एक बड़ी विनाशकारी साजिश को विफल कर दिया है। गुरुवार को CRPF की 74वीं बटालियन और CoBRA 201 के जवानों ने एक संयुक्त 'सर्च ऑपरेशन' के दौरान नक्सलियों द्वारा छिपाए गए हथियारों और विस्फोटकों के एक बड़े डंप (जखीरे) को बरामद किया। यह सफलता तब मिली जब जवान इलाके में 'एरिया डोमिनेशन' (Area Domination) पर निकले थे। गोगुंडा पहाड़ के दूसरे छोर पर तलाशी के दौरान जवानों को 5 किलो वजनी एक शक्तिशाली IED (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) मिला, जिसे जवानों को निशाना बनाने के लिए प्लांट किया गया था।
बम निरोधक दस्ते (Bomb Disposal Squad) ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस शक्तिशाली बम को मौके पर ही सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय कर दिया। सुरक्षाबलों की इस आक्रामक कार्रवाई से नक्सलियों के शीर्ष नेतृत्व में भारी घबराहट देखी जा रही है। गौरतलब है कि इससे ठीक एक दिन पहले जवानों ने कुख्यात नक्सली कमांडर रमन्ना के 20 फीट ऊंचे स्मारक को भी जमींदोज कर दिया था। पिछले 40 वर्षों में पहली बार इस दुर्गम इलाके में सुरक्षाबलों के कैंप स्थापित होने से माओवादियों का प्रभाव तेजी से कम हो रहा है।
सीआरपीएफ कमांडेंट हिमांशु पांडे ने इस ऑपरेशन की पुष्टि करते हुए कहा कि सुरक्षाबलों का प्राथमिक लक्ष्य पूरे बस्तर और सुकमा क्षेत्र को नक्सल मुक्त बनाना है। गोगुंडा की पहाड़ियों में अब विकास की लहर शुरू हो चुकी है और यह अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक अंतिम नक्सली का सफाया नहीं हो जाता। नक्सलियों के बैकफुट पर जाने से अब इस सुदूर क्षेत्र में सड़कों, स्कूलों और अस्पतालों जैसी बुनियादी सुविधाओं के पहुंचने का रास्ता साफ हो गया है।
नक्सली संगठन इस समय अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने के लिए छटपटा रहे हैं, लेकिन सुरक्षाबलों की निरंतर चौकसी ने उनकी कमर तोड़ दी है। स्थानीय ग्रामीणों ने भी दशकों बाद सुरक्षाबलों की मौजूदगी में राहत की सांस ली है, क्योंकि गोगुंडा अब 'मुक्त क्षेत्र' बनने की ओर अग्रसर है।