वाशिंगटन (अमेरिका): अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) का नोबेल शांति पुरस्कार के प्रति आकर्षण एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गया है। हाल ही में अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा सार्वजनिक की गई जेफरी एपस्टीन (Jeffrey Epstein) की गोपनीय फाइलों ने इस मामले में एक नया और सनसनीखेज मोड़ दे दिया है। इन दस्तावेजों से पता चलता है कि कुख्यात फाइनेंशर एपस्टीन ने नोबेल शांति पुरस्कार समिति के पूर्व चेयरमैन थॉरबोर्न यागलैंड (Thorbjørn Jagland) के साथ अपनी नजदीकियों का इस्तेमाल कर दुनिया के सबसे शक्तिशाली लोगों के बीच पैठ बनाई थी।
इन फाइलों में एक ईमेल का जिक्र है जो एपस्टीन ने ट्रंप के करीबी सहयोगी स्टीव बैनन को भेजा था। इसमें लिखा था कि यदि डोनाल्ड ट्रंप को यह पता चल जाए कि नोबेल चयन समिति का प्रमुख एपस्टीन के साथ है, तो उनका 'सिर फट जाएगा'। यह खुलासा इस बात की पुष्टि करता है कि एपस्टीन को ट्रंप के नोबेल प्रेम की पूरी जानकारी थी और वह इसका इस्तेमाल प्रभाव जमाने के लिए कर रहा था। थॉरबोर्न यागलैंड, जो 2009 से 2015 तक नोबेल समिति के अध्यक्ष रहे, उनके कार्यकाल के दौरान ही बराक ओबामा और यूरोपीय संघ को यह प्रतिष्ठित सम्मान मिला था।
न्याय विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, एपस्टीन ने यागलैंड के नाम का उपयोग बिल गेट्स, स्टीव बैनन और व्हाइट हाउस की पूर्व सलाहकार कैथी रूमलर जैसे दिग्गजों को लुभाने के लिए किया था। एपस्टीन के मेल बताते हैं कि उसने यागलैंड को न्यूयॉर्क और पेरिस स्थित अपनी आलीशान संपत्तियों में ठहरने की सुविधा भी दी थी। हालांकि अभी तक किसी विशिष्ट व्यक्ति के लिए सीधे तौर पर लॉबिंग के सबूत नहीं मिले हैं, लेकिन इन दस्तावेजों में यागलैंड का नाम हजारों बार आना एक बड़े भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।
इन्हीं फाइलों में यह भी दर्ज है कि 2014 में बिल गेट्स ने भी यागलैंड की भूमिका पर सवाल उठाए थे। वर्तमान में एपस्टीन फाइल्स में नाम उछलने के बाद नॉर्वे की आर्थिक अपराध इकाई ने यागलैंड के खिलाफ जांच शुरू कर दी है। दूसरी ओर, वेनेजुएला की नेता मारिया कोरीना मचाडो द्वारा ट्रंप को नोबेल के लिए नामित किए जाने के बाद से ही अमेरिकी राजनीति में इस पुरस्कार को लेकर बहस तेज हो गई है। यह घटनाक्रम दर्शाता है कि कैसे दुनिया के सर्वोच्च सम्मानों के पीछे भी पर्दे के पीछे की लॉबिंग और प्रभावशाली नेटवर्क काम करते रहे हैं।