हिसार में 2300 स्कूली बसों की होगी फिटनेस जांच: मानवाधिकार आयोग के आदेश पर सुरक्षा मानकों को लेकर प्रशासन सख्त


हिसार (हरियाणा): नूंह (मेवात) के गांव छछेड़ा स्थित एक निजी स्कूल में सात साल की मासूम बच्ची के साथ हुई बेरहमी से मारपीट के मामले में मानवाधिकार आयोग (Human Rights Commission) ने कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने संज्ञान लेते हुए हरियाणा के समस्त निजी स्कूलों की बसों की सघन चेकिंग करने के कड़े आदेश दिए हैं। इसी कड़ी में हिसार जिले के 650 प्राइवेट स्कूलों की लगभग 2300 बसों की फिटनेस और सुरक्षा मानकों की जांच करने का एक बड़ा अभियान शुरू किया जा रहा है। इस महा-चेकिंग अभियान के लिए जिले भर में कुल 6 विशेष चेकिंग पॉइंट बनाए गए हैं। पहली कड़ी के तहत शनिवार को हिसार शहर की सभी स्कूली बसों को पुलिस लाइन हिसार में तलब किया गया है, जहाँ क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण (RTA) की विशेष टीमें इन बसों की फिटनेस रिपोर्ट तैयार करेंगी।

इस प्रशासनिक आदेश को लेकर जहां एक तरफ सुरक्षा के लिहाज से संतोष जताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर 'तेल बचाओ' के नारे को लेकर एक बहस भी छिड़ गई है। आलोचकों का कहना है कि हिसार बस स्टैंड से पुलिस लाइन की दूरी करीब 3.7 किलोमीटर है, जिसके कारण शहर की सैकड़ों बसों को इतनी लंबी दूरी तय कर एक ही जगह बुलाने से भारी मात्रा में ईंधन की बर्बादी होगी। यह पूरा मामला तब सामने आया जब नूंह में बच्ची की पिटाई के बाद जब पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के लिए स्कूल बस चालक से क्लिप मांगी, तो बस के अंदर CCTV Cameras गायब मिले। इसके बाद मानवाधिकार आयोग ने आरटीए को प्रदेश स्तर पर चेकिंग कर रिपोर्ट भेजने की हिदायतें जारी कीं और नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी।

आरटीए हिसार, संजय श्योराण ने स्पष्ट किया है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) द्वारा स्कूली बच्चों की सुरक्षा के लिए तय किए गए सभी 12 प्रमुख मानकों को पूरा करना हर स्कूल प्रबंधन के लिए अनिवार्य होगा। इन कड़े नियमों के तहत:

रंग और पहचान: सभी स्कूली बसों का रंग अनिवार्य रूप से पीला होना चाहिए और आगे-पीछे स्पष्ट अक्षरों में 'स्कूल बस' (या किराए की बस होने पर 'ऑन स्कूल ड्यूटी') लिखा होना चाहिए। बस पर स्कूल का नाम और संपर्क नंबर दर्ज होना जरूरी है।

आंतरिक सुरक्षा: खिड़कियों पर लोहे की मजबूत ग्रिल, दरवाजों पर ऑटोमैटिक लॉक, सीटों के नीचे बैग रखने की जगह, एक First Aid Box (प्राथमिक चिकित्सा बॉक्स) और चालू हालत में अग्निशमन यंत्र (Fire Extinguisher) हमेशा मौजूद होना चाहिए।

तकनीकी मानक: बसों में गति नियंत्रण के लिए Speed Governor के साथ-साथ ट्रैकिंग के लिए जीपीएस (GPS) और सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे पूरी तरह से क्रियाशील होने चाहिए।

स्टाफ की योग्यता: चालक के पास भारी वाहन (Heavy Vehicle) चलाने का कम से कम 5 साल का बेदाग अनुभव होना चाहिए। वह किसी भी ट्रैफिक उल्लंघन या ड्रंक एंड ड्राइव का दोषी नहीं होना चाहिए। इसके अलावा बच्चों की देखरेख के लिए बस में एक योग्य अटेंडेंट का होना अनिवार्य है।



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