लखनऊ / गोरखपुर: राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) के हालिया परिणामों में उत्तर प्रदेश के दो होनहारों ने यह साबित कर दिया है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो गरीबी और कठिन परिस्थितियां भी रास्ता नहीं रोक सकतीं। लखनऊ में घर-घर जाकर घरेलू सहायिका के रूप में काम करने वाली महिला की बेटी नीलू और गोरखपुर के एक ऑटो रिक्शा चालक के बेटे विशाल तिवारी ने इस बेहद कठिन परीक्षा में सफलता हासिल कर एक नया इतिहास रच दिया है। इन दोनों छात्रों का संघर्ष और कामयाबी अब देश भर के हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है।
पिता को खोने के दर्द ने नीलू को बनाया डॉक्टर, विपरीत हालातों में हासिल किए 94% अंक
गोमती नगर (लखनऊ) के एक गांव में रहने वाली नीलू के जीवन में एक ऐसा मोड़ आया जिसने उसकी जिंदगी की दिशा ही बदल दी। जब वह आठवीं कक्षा में थी, तब सही इलाज न मिल पाने के कारण उसके पिता का निधन हो गया था। आर्थिक तंगी के चलते परिवार बेहतर इलाज का खर्च उठाने में असमर्थ था। नीलू ने बताया, "मेरे पिता की मौत सिर्फ इसलिए हुई क्योंकि हम इलाज का खर्च नहीं उठा सके। उसी दिन मैंने संकल्प लिया था कि मैं डॉक्टर बनूंगी, ताकि किसी और गरीब परिवार को पैसों की कमी की वजह से अपना प्रियजन न खोना पड़े।"
नीलू की प्रारंभिक शिक्षा 'स्टडी हॉल एजुकेशन फाउंडेशन (SHEF)' द्वारा संचालित 'प्रेरणा बालिका स्कूल' से हुई। 11वीं और 12वीं की पढ़ाई के लिए उसे छात्रवृत्ति (Scholarship) मिली। इस वर्ष उसने सीबीएसई 12वीं की परीक्षा में 94 प्रतिशत अंक हासिल करने के साथ-साथ नीट परीक्षा भी पास कर ली है। भविष्य में कार्डियोलॉजिस्ट (हृदय रोग विशेषज्ञ) बनने का सपना देख रही नीलू को आगे की मेडिकल शिक्षा के लिए भी पूरी स्कॉलरशिप मिल गई है, जिससे उसकी पढ़ाई और रहने का पूरा खर्च वहन किया जाएगा।
रिश्तेदारों और समाज के लोगों ने नीलू की मां पर बेटियों की पढ़ाई छुड़ाकर शादी करने का भारी दबाव बनाया था। लेकिन अस्पताल में अटेंडेंट और घरेलू सहायिका के रूप में काम करने वाली उसकी मां ने समाज के तानों को दरकिनार कर बेटियों की शिक्षा जारी रखी। 'स्टडी हॉल एजुकेशन फाउंडेशन' की संस्थापक और सीईओ उर्वशी साहनी तथा स्कूल की प्रधानाचार्य मीनाक्षी बहादुर ने नीलू को बेहद मेहनती बताते हुए उसकी सफलता को उसकी कड़ी मेहनत का परिणाम कहा है।
ऑटो चालक के बेटे विशाल ने चौथे प्रयास में पाई मंजिल, शादी के बाद भी जारी रखा संघर्ष
गोरखपुर के रहने वाले विशाल तिवारी की सफलता की कहानी भी बेमिसाल है। एक ऑटो रिक्शा चालक संतोष तिवारी के बेटे विशाल ने तमाम आर्थिक तंगियों के बीच अपने चौथे प्रयास में नीट परीक्षा में 720 में से 605 अंक प्राप्त कर सफलता का परचम लहराया। वर्ष 2022 में 12वीं पास करने के बाद विशाल के पास कोचिंग जाने के पैसे नहीं थे, इसलिए उसने बिना कोचिंग के ही घर पर तैयारी शुरू की।
इस लंबे संघर्ष के दौरान विशाल की शादी हो गई और वह एक बच्चे के पिता भी बने। पारिवारिक जिम्मेदारियां बढ़ने के बावजूद उसने डॉक्टर बनने का अपना सपना नहीं छोड़ा। साल 2024 में उसके पिता ने किसी तरह कर्ज लेकर उसे एक कोचिंग संस्थान में दाखिला दिलाया। विशाल ने कोचिंग के साथ-साथ देर रात तक लाइब्रेरी में पढ़ाई की और खुद का खर्च निकालने के लिए बच्चों को ट्यूशन भी पढ़ाया। अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता और पत्नी को देते हुए विशाल ने भावुक होकर कहा, "डॉक्टर बनने के बाद मैं सबसे पहले अपने पिता के लिए एक कार खरीदना चाहता हूं, ताकि उन्हें दोबारा ऑटो न चलाना पड़े।"