नई दिल्ली: लद्दाख के प्रमुख शिक्षाविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के आंदोलन को लेकर कानूनी लड़ाई अब देश की राजधानी की सबसे बड़ी अदालत में पहुंच गई है। सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंगमो ने दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) का दरवाजा खटखटाते हुए इस गंभीर मामले में तुरंत सुनवाई की मांग की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि दिल्ली पुलिस ने कोर्ट के पुराने आदेशों का गलत फायदा उठाकर सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से जबरन हटाया और उन्हें एक तरह से नजरबंद (Detained) कर दिया है।
गीतांजलि आंगमो ने आरोप लगाया है कि इलाज के नाम पर उनके पति को दिल्ली पुलिस द्वारा अस्पताल में कैद किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अब उनका सरकारी चिकित्सा व्यवस्था पर भरोसा नहीं रहा है और वह वांगचुक की तबीयत और ज्यादा बिगड़ने से पहले उन्हें वहां से निकालकर अपनी पसंद के किसी निजी अस्पताल (Private Hospital) में भर्ती कराना चाहती हैं।
सोशल मीडिया पर साधा निशाना, स्वास्थ्य बुलेटिन पर उठाए सवाल
आंग्मो ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' (X) पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि किसी भी परिवार को अपने प्रियजन का इलाज किस अस्पताल में कराया जाए, यह तय करने के लिए प्रशासन से संघर्ष करने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी गंभीर आरोप लगाया कि अस्पताल प्रशासन द्वारा जारी किए गए स्वास्थ्य बुलेटिन (Health Bulletin) में वांगचुक के पोटेशियम स्तर के वास्तविक आंकड़े को जानबूझकर और सुविधाजनक ढंग से छोड़ दिया गया है। उन्होंने कहा कि बार-बार अनुरोध करने के बावजूद प्रशासन उन्हें छुट्टी देने या किसी अन्य निजी अस्पताल में स्थानांतरित (शिफ्ट) करने की अनुमति नहीं दे रहा है।
अस्पताल में 100 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात, अवैध हिरासत का आरोप
गीतांजलि आंगमो द्वारा माननीय न्यायालय में दी गई अर्जी में दिल्ली पुलिस और अस्पताल प्रशासन के रवैये पर कई गंभीर कानूनी सवाल खड़े किए गए हैं। याचिका के अनुसार, सोनम वांगचुक को डॉक्टरों की देखरेख के नाम पर रखा गया है, लेकिन असल में वहां उन्हें किसी भी बाहरी व्यक्ति या समर्थकों से मिलने नहीं दिया जा रहा है।
याचिका के मुख्य अंश: "जिस मंजिल पर हम हैं, वहां लगभग 30 पुलिसकर्मी चौबीसों घंटे तैनात हैं और पूरे अस्पताल परिसर में 100 से अधिक दिल्ली पुलिस के जवान मौजूद हैं। हमारी आवाजाही पर कड़ी पाबंदी लगा दी गई है। यह चिकित्सकीय देखभाल नहीं, बल्कि सीधे तौर पर एक अवैध हिरासत (Illegal Custody) है। इसलिए मैंने उच्च न्यायालय का रुख किया है और तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया है ताकि सोनम की तबीयत और बिगड़ने से पहले उन्हें स्थानांतरित करने की अनुमति मिल सके।"
गौरतलब है कि सोनम वांगचुक को शनिवार को उनकी भूख हड़ताल के 21वें दिन दिल्ली पुलिस जबरन अस्पताल ले गई थी। उन्होंने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) में कथित अनियमितताओं और इस विवाद से जुड़े छात्रों की कथित मौत के विरोध में कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के नेतृत्व में चल रहे देशव्यापी आंदोलन के समर्थन में बीते 28 जून को अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल (Hunger Strike) शुरू की थी।