शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने अफजाल अंसारी को भेजा साधुवाद: सांसद ने गाय के घी को बताया 'अमृत', गोरक्षा के मुद्दे पर दिया समर्थन



नई दिल्ली/गाजीपुर: ज्योर्तिमठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गाजीपुर के समाजवादी पार्टी सांसद अफजाल अंसारी को एक विशेष पत्र भेजकर गाय की गरिमा और सुरक्षा के मुद्दे पर उनके स्टैंड की सराहना की है। शंकराचार्य द्वारा मिले इस साधुवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए सांसद अफजाल अंसारी ने स्पष्ट किया कि वह गाय को केवल धार्मिक चश्मे से नहीं बल्कि इसके औषधीय और सामाजिक महत्व के कारण भी पूजनीय मानते हैं। The Member of Parliament emphasized that he has always advocated for cow protection and intends to raise this critical issue in the Parliament to ensure that the voice for the 'National Mother' status reaches the highest corridors of power.

सांसद अंसारी ने इस दौरान मुसलमानों और गाय के मांस को लेकर समाज में फैली भ्रांतियों पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि यह एक गलत प्रोपेगंडा है कि मुसलमान गाय के प्रति सम्मान नहीं रखते; बल्कि इस्लाम की शिक्षाएं भी जीव हत्या के विरुद्ध हैं। अफजाल अंसारी ने अपने बचपन की यादें साझा करते हुए बताया कि कैसे उनकी मां नजला और सर्दी होने पर गाय के पुराने घी का उपयोग दवा के रूप में करती थीं, जिसे वे 'अमृत समान' मानते हैं। He asserted that no true Muslim intends to hurt the religious sentiments of their Hindu brothers and that the benefits of cow-derived products like ghee are universal, transcending religious boundaries.

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद लंबे समय से देश भर में 'गौ प्रतिष्ठा यात्रा' के माध्यम से गाय को 'राष्ट्र माता' घोषित करने और गौ-हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग कर रहे हैं। अफजाल अंसारी के इस खुले समर्थन को गंगा-जमुनी तहजीब और सांप्रदायिक सौहार्द के एक बड़े उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है। The MP stated that he is a staunch supporter of the Shankaracharya’s movement and will continue to praise this cause on public platforms. इस पत्र व्यवहार ने उत्तर प्रदेश की राजनीति और सामाजिक विमर्श में गोरक्षा के मुद्दे को एक नई और समावेशी दिशा दी है।



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