नई दिल्ली: दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को गुरुवार को कथित शराब घोटाले से जुड़े दो मामलों में बड़ी कानूनी राहत मिली है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दर्ज उन दो आपराधिक शिकायतों में केजरीवाल को बरी कर दिया है, जो जांच एजेंसी के समन की अनदेखी करने के आरोपों से संबंधित थीं। एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (ACJM) पारस दलाल ने अपने फैसले में कहा कि ईडी यह साबित करने में विफल रही कि केजरीवाल ने जानबूझकर समन का उल्लंघन किया। अदालत ने ईमेल के जरिए समन भेजने को भी वैध तामील नहीं माना। इस फैसले के तुरंत बाद केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर 'सत्यमेव जयते' लिखकर अपनी खुशी जाहिर की। The court's decision provides a significant moral and legal boost to the AAP leadership amidst the ongoing excise policy investigation.
अदालत ने अपने विस्तृत आदेश में स्पष्ट किया कि ईडी ने सीआरपीसी (CrPC) या पीएमएलए (PMLA) के प्रावधानों के तहत यह साबित नहीं किया कि आरोपी को समन की नियमानुसार जानकारी दी गई थी। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि एक मुख्यमंत्री के रूप में केजरीवाल के पास आवाजाही के मौलिक अधिकार थे और केवल ईमेल के जरिए समन भेजना पर्याप्त सबूत नहीं है। गौरतलब है कि ईडी ने फरवरी 2024 में धारा 174 (लोक सेवक के आदेश की अवज्ञा) के तहत यह शिकायतें दर्ज कराई थीं, जब केजरीवाल पांच बार समन भेजने के बावजूद पूछताछ के लिए पेश नहीं हुए थे। इसी तरह के एक अन्य मामले में ओखला से आप विधायक अमानतुल्लाह खान को भी वक्फ बोर्ड मनी लॉन्ड्रिंग मामले के समन से जुड़े केस में बरी कर दिया गया है। The ruling highlights procedural lapses by the central agency in serving legal notices to the former Chief Minister.
हालांकि, भाजपा ने इस फैसले पर स्पष्ट किया है कि अरविंद केजरीवाल को मुख्य 'शराब घोटाले' (Excise Policy Case) से बरी नहीं किया गया है, बल्कि उन्हें केवल समन का पालन न करने के तकनीकी मामले में राहत मिली है। भाजपा नेताओं का कहना है कि भ्रष्टाचार का मुख्य मुकदमा अभी भी जारी है और केजरीवाल उसमें मुख्य आरोपी बने हुए हैं। आम आदमी पार्टी की ओर से प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ और सौरभ भारद्वाज ने इसे सच्चाई की जीत बताते हुए कहा कि यह फैसला साबित करता है कि ईडी के मामले राजनीति से प्रेरित थे। कोर्ट के इस आदेश ने आगामी दिल्ली नगर निगम और अन्य राजनीतिक गतिविधियों के बीच आप कार्यकर्ताओं में नया जोश भर दिया है। The political tug-of-war continues as the main corruption trial remains pending in the higher courts.