प्रयागराज: संगम नगरी में माघ मेला 2026 के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और मेला प्रशासन के बीच चल रहा गतिरोध अब आर-पार की लड़ाई में तब्दील हो गया है। प्रयागराज मेला प्राधिकरण द्वारा जमीन और सुविधाएं वापस लेने तथा भविष्य में मेले में प्रवेश प्रतिबंधित करने की चेतावनी वाले नोटिस पर शंकराचार्य ने तीखा पलटवार किया है। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर किस आधार पर सुविधाएं दी गई थीं और अब किस आधार पर उन्हें वापस लेने की धमकी दी जा रही है। शंकराचार्य ने स्पष्ट किया कि वह 100 करोड़ सनातनियों के सम्मान से समझौता नहीं करेंगे और प्रशासन की दमनकारी नीतियों के आगे झुकने का सवाल ही पैदा नहीं होता। The escalating conflict between the high-ranking spiritual leader and the state authorities has sent shockwaves through the ongoing religious congregation.
प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने शंकराचार्य को 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए स्पष्टीकरण मांगा था कि मौनी अमावस्या के दिन बिना अनुमति पालकी पर सवार होकर संगम जाने और बैरियर गिराकर अव्यवस्था फैलाने के आरोप में उनकी संस्था का आवंटन क्यों न निरस्त कर दिया जाए। इस पर शंकराचार्य के विधिक दल ने आठ पन्नों का विस्तृत जवाब सौंपते हुए प्रशासन को ही 24 घंटे के भीतर नोटिस वापस लेने की चेतावनी दी है। शंकराचार्य के अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि प्रशासन कोर्ट के आदेशों की गलत व्याख्या कर रहा है और यदि नोटिस वापस नहीं लिया गया, तो वे मानहानि और अवमानना की कार्रवाई के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे। The legal standoff highlights a deep-seated disagreement over protocol and traditional rights during major bathing festivals.
प्रशासन का तर्क है कि मौनी अमावस्या जैसे भारी भीड़ वाले दिन सुरक्षा कारणों से पालकी की अनुमति नहीं दी गई थी, जबकि शंकराचार्य का कहना है कि वे भगदड़ से बचने के लिए ही पालकी का उपयोग करते हैं ताकि दूर से ही लोग उनके दर्शन कर सकें। इस बीच, शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने 'बैक डेट' में नोटिस चस्पा कर बदले की भावना से काम किया है। शिविर के आसपास की घेराबंदी और बिजली-पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं काटने की धमकियों ने भक्तों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। राजनीतिक रूप से भी यह मुद्दा गरमा गया है, जहाँ विपक्ष इसे संतों का अपमान बता रहा है, वहीं प्रशासन इसे कानून-व्यवस्था बनाए रखने की मजबूरी करार दे रहा है। The tension at the Magh Mela grounds remains palpable as the deadline for the latest administrative notice nears its end.