बांग्लादेश में सत्ता के लिए खूनी खेल: चुनाव जीतने के लिए हिंदुओं के खिलाफ हिंसा को बनाया जा रहा है हथियार, खुफिया रिपोर्ट में सनसनीखेज खुलासे


ढाका: बांग्लादेश में आगामी 12 फरवरी, 2026 को होने वाले आम चुनावों से पहले अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदुओं के खिलाफ नफरत और हिंसा का माहौल चरम पर पहुंच गया है। खुफिया सूत्रों और हालिया मीडिया रिपोर्टों से यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि कई चुनावी उम्मीदवार वोट बैंक के ध्रुवीकरण के लिए जानबूझकर हिंदू विरोधी भावनाओं को भड़का रहे हैं। मु. यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार की विफलता के बीच कट्टरपंथी तत्व और स्थानीय नेता मिलकर हिंदुओं के खिलाफ हिंसा को एक सोची-समझी 'चुनावी रणनीति' की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। Political analysts suggest that these Planned Attacks are being orchestrated to intimidate minority voters and consolidate extremist support.

खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, कट्टरपंथी मौलवियों और राजनीतिक उम्मीदवारों के बीच एक खतरनाक सांठगांठ बनी है। इन मौलवियों को सार्वजनिक सभाओं में खुलेआम हिंदुओं और गैर-मुस्लिम उम्मीदवारों के खिलाफ नफरत फैलाने वाले बयान देते देखा जा रहा है। सबसे डरावना पहलू एक सांसद उम्मीदवार का वह कथित कबूलनामा है, जिसमें उसने स्वीकार किया कि हिंदू इलाकों पर हमले और उन्हें निशाना बनाने की अपील करना अब चुनाव जीतने का एक 'आजमाया हुआ फॉर्मूला' बन गया है। इन हिंसक तत्वों को 'इस्लाम के सैनिक' कहकर महिमामंडन किया जा रहा है, जिससे जमीनी स्तर पर तनाव और अधिक बढ़ गया है। This calculated use of Communal Incitement is turning the pre-election period into a nightmare for the 20 million religious minorities in the country.

भारत सरकार ने भी बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हो रहे इन निरंतर हमलों पर गंभीर चिंता जताई है। हाल ही में मैमनसिंह में एक हिंदू युवक की पीट-पीटकर हत्या और नरसिंहदी में एक अन्य युवक को जलाकर मार डालने जैसी घटनाओं ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। जहाँ अंतरिम सरकार इन घटनाओं को 'गैर-सांप्रदायिक' या आपराधिक बताकर टालने की कोशिश कर रही है, वहीं अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने इसे राज्य की विफलता और अल्पसंख्यकों का प्रणालीगत उत्पीड़न बताया है। चुनावों के नजदीक आते ही कट्टरपंथी तत्वों के बढ़ते प्रभाव के कारण कई हिंदू परिवार पलायन के लिए मजबूर हो रहे हैं। The Systemic Neglect by the current administration has empowered extremists, leading to an atmosphere of fear and instability across Bangladesh.


Previous Post Next Post