बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर उठे सवाल: यूनुस सरकार ने पेश किए 645 घटनाओं के आंकड़े, भारत ने जताई 'गहरी चिंता'



ढाका: बांग्लादेश की मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने सोमवार को वर्ष 2025 के दौरान अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ हुई हिंसा पर एक विस्तृत रिपोर्ट जारी की है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से दिसंबर 2025 के बीच पूरे देश में अल्पसंख्यकों से जुड़ी कुल 645 घटनाएं दर्ज की गईं। हालांकि, सरकार ने इन घटनाओं को मुख्य रूप से 'सांप्रदायिक' मानने के बजाय 'अपराधिक' करार दिया है। The interim government stated that out of the 645 incidents, only 71 were identified as having communal motives, including 38 cases of temple vandalism and 8 incidents of arson. सरकार का तर्क है कि शेष 574 घटनाएं भूमि विवाद, व्यक्तिगत दुश्मनी, चोरी और अन्य सामाजिक संघर्षों का परिणाम थीं, जिन्हें धार्मिक रंग देना गलत है।

इस रिपोर्ट के विपरीत, मानवाधिकार संगठनों और भारत सरकार ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदुओं की स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। भारत के विदेश मंत्रालय ने 9 जनवरी को दिए एक कड़े बयान में कहा था कि बांग्लादेश में चरमपंथियों द्वारा अल्पसंख्यकों के घरों, व्यवसायों और पूजा स्थलों पर लक्षित हमलों का एक 'चिंताजनक सिलसिला' चल रहा है। India has urged the Bangladeshi authorities to act "swiftly and firmly" against the perpetrators and criticized efforts to categorize such targeted violence as mere personal or political disputes. हाल के हफ्तों में कई हिंदुओं की हत्या और बलात्कार की घटनाओं ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान आकर्षित किया है, जिससे ढाका पर दबाव बढ़ गया है।

बांग्लादेश हिंदू बौद्ध क्रिश्चियन यूनिटी काउंसिल (BHBCUC) ने भी सरकार के दावों को चुनौती देते हुए कहा है कि अकेले दिसंबर 2025 में सांप्रदायिक हिंसा की 51 घटनाएं हुई हैं। काउंसिल का आरोप है कि 12 फरवरी 2026 को होने वाले संसदीय चुनावों से पहले अल्पसंख्यक मतदाताओं को डराने के लिए हिंसा का सहारा लिया जा रहा है। Rights groups have highlighted that the dismissal of religious angles by the Yunus administration even before thorough investigations are completed is encouraging extremists. वर्तमान में भारत और बांग्लादेश के बीच राजनयिक संबंधों में इस मुद्दे को लेकर काफी तल्खी देखी जा रही है, क्योंकि नई दिल्ली इन घटनाओं को 'प्रचार' बताने के ढाका के रुख से असहमत है।



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