नई दिल्ली: उन्नाव दुष्कर्म मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए सेंगर की सजा पर रोक लगाने और जमानत देने वाली याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया है। यह विशेष मामला पीड़िता के पिता की पुलिस हिरासत में हुई मौत से जुड़ा है, जिसमें सेंगर को 10 साल की सजा सुनाई गई थी। Justice Navin Chawla and Justice Shalinder Kaur clarified that given Sengar's extensive criminal record and the gravity of the offenses, he cannot be granted bail while his appeal against the conviction is still pending.
अदालत ने सुनवाई के दौरान सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि आरोपी का पूर्व आपराधिक इतिहास ऐसा है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। हालांकि सेंगर के वकीलों ने तर्क दिया था कि वह अपनी 10 साल की सजा में से लगभग साढ़े सात साल पहले ही जेल में बिता चुके हैं, लेकिन कोर्ट ने इस दलील को पर्याप्त नहीं माना। The High Court also pointed out that the delay in the final disposal of Sengar's appeal was partly due to the numerous interim applications filed by the appellant himself over the years. अदालत ने आदेश दिया कि अब इस मामले में दोषसिद्धि के विरुद्ध दायर मुख्य अपील पर शीघ्रता से सुनवाई करना ही न्यायपूर्ण होगा।
गौरतलब है कि 23 दिसंबर 2025 को हाई कोर्ट की एक अन्य पीठ ने सेंगर को जमानत दी थी, जिसे सीबीआई (CBI) ने तुरंत सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने उस समय जमानत पर रोक लगा दी थी, जिसके बाद अब हाई कोर्ट ने ताजा याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है। In December 2019, a trial court had sentenced Sengar to life imprisonment for the kidnapping and rape of a minor in Unnao and imposed a fine of ₹25 lakh. वर्तमान फैसले के बाद यह साफ हो गया है कि सेंगर को अपनी कानूनी लड़ाई जेल की सलाखों के पीछे से ही लड़नी होगी।