अमृतसर: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान गुरुवार को सिखों के सर्वोच्च तख्त श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष पेश हुए। मुख्यमंत्री ने अपनी पेशी से पहले नंगे पांव श्री हरमंदिर साहिब में माथा टेका और उसके बाद एक काले रंग के बैग में जरूरी दस्तावेज लेकर अकाल तख्त सचिवालय पहुंचे। यह पेशी सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक विवादित वीडियो और गुरुद्वारों की 'गोलक' को लेकर की गई कुछ टिप्पणियों के संबंध में मांगी गई सफाई के सिलसिले में थी। जत्थेदार के समक्ष अपना पक्ष रखने के बाद बाहर आए मुख्यमंत्री ने भावुक होते हुए कहा कि अकाल तख्त साहिब को चुनौती देने की न तो उनकी हिम्मत है और न ही औकात। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके खिलाफ सोशल मीडिया पर एक गलत नरेटिव तैयार किया जा रहा है।
During the closed-door meeting, CM Mann submitted a formal written explanation and evidence to the Jathedar, refuting allegations of disrespecting Sikh traditions. मुख्यमंत्री ने जत्थेदार को बताया कि सोशल मीडिया पर जो आपत्तिजनक वीडियो वायरल हो रही है, वह पूरी तरह से फर्जी (डॉक्टर्ड) है और वह इसकी किसी भी स्वतंत्र लैब से जांच कराने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि एक सिख के रूप में वह अकाल तख्त के प्रति पूरी तरह समर्पित हैं और जत्थेदार साहिब का जो भी अगला आदेश होगा, वह उन्हें सहर्ष स्वीकार होगा। मान ने कहा कि जत्थेदार को सबूत सौंपने के बाद उन्हें आत्मिक शांति और सुकून महसूस हो रहा है।
Following the meeting, Jathedar Kuldeep Singh Gadagaj confirmed that the Chief Minister's explanation regarding the 'Golak' and the viral video has been recorded and will be discussed in the upcoming meeting of the 'Five Singh Sahiban'. जत्थेदार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि अकाल तख्त किसी के प्रति बैर नहीं रखता। उन्होंने मुख्यमंत्री को वीडियो की सत्यता प्रमाणित करने के लिए दो लैब के नाम बताने को कहा है ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। आने वाले दिनों में सिंह साहिबान की बैठक में इस स्पष्टीकरण पर विचार-विमर्श के बाद ही अंतिम फैसला लिया जाएगा। फिलहाल, पंजाब की सियासत में इस पेशी को मुख्यमंत्री द्वारा सिख धार्मिक संस्थाओं के साथ टकराव टालने की एक बड़ी कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।