गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक क्यों पिता को नहीं देखना चाहिए बच्चे का मुख? जानें ज्योतिषीय कारण और समाधान



नई दिल्ली: हिंदू धर्म में बच्चे के जन्म के साथ ही ग्रह-नक्षत्रों की गणना का विशेष महत्व होता है। इसी गणना के दौरान यदि बच्चे का जन्म 'गंडमूल नक्षत्र' में होता है, तो परिवार में खुशियों के साथ-साथ एक विशेष सावधानी की चर्चा शुरू हो जाती है। सदियों से चली आ रही परंपरा के अनुसार, गंडमूल में जन्मे शिशु का चेहरा पिता को 27 दिनों तक नहीं दिखाया जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के मुताबिक, इन नक्षत्रों की ऊर्जा इतनी विशिष्ट और "संधि काल" की होती है कि इसका सीधा प्रभाव पिता के स्वास्थ्य, मानसिक स्थिति और आर्थिक उन्नति पर पड़ सकता है। The custom of preventing the Father-Child Meeting for 27 days is rooted in the belief that the intense planetary transition during these specific constellations can bring unforeseen challenges to the parent.

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कुल 27 नक्षत्रों में से 6 नक्षत्र अश्विनी, आश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मूल और रेवती को 'गंडमूल' की श्रेणी में रखा गया है। यह वह समय होता है जब राशि और नक्षत्र दोनों एक साथ समाप्त होकर नए चक्र की शुरुआत कर रहे होते हैं। माना जाता है कि इस 'संधि काल' में जन्मे बालक का तेज और ग्रहों का प्रभाव इतना प्रबल होता है कि बिना शांति पूजा के पिता का उसे देखना अनिष्टकारी हो सकता है। इसके पीछे एक खगोलीय तर्क यह भी है कि चंद्रमा को अपना चक्र पूरा कर उसी नक्षत्र में वापस आने में 27 दिन लगते हैं। Only after the completion of this Lunar Cycle, the specific 'Mool Shanti' puja is performed to neutralize any perceived negative effects.

आज के आधुनिक युग में भले ही कई लोग इसे अंधविश्वास का नाम दें, लेकिन पारंपरिक परिवारों में आज भी 'सतैसा' या 'मूल शांति' पूजा का विधान पूरी श्रद्धा से निभाया जाता है। पूजा के दौरान छाया दान (कांसे की कटोरी में घी भरकर चेहरा देखना) और दान-पुण्य का विशेष महत्व है। विद्वानों का मानना है कि गंडमूल में जन्म लेना अशुभ नहीं है, बल्कि यह बच्चा असाधारण प्रतिभा का धनी हो सकता है, बस शुरुआती सावधानी आवश्यक है। शांति पाठ के बाद शुभ मुहूर्त में पिता अपने शिशु को पहली बार गोद में ले सकते हैं। The ritual emphasizes Spiritual Protection for both the newborn and the family, ensuring a harmonious start to the child's life journey.



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