हर की पौड़ी पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक की मांग: श्री गंगा सभा ने सरकार को चेताया, कहा— "सनातन परंपरा की रक्षा सर्वोपरि"


हरिद्वार: आगामी कुंभ मेले से पहले धर्मनगरी हरिद्वार में 'हर की पौड़ी' और आसपास के गंगा घाटों पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश को प्रतिबंधित करने की मांग ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। श्री गंगा सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम ने गुरुवार को कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि यह मांग केवल एक संस्था की नहीं, बल्कि करोड़ों सनातनियों की आस्था और मां गंगा की धार्मिक अस्मिता से जुड़ा विषय है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि 1916 के म्युनिसिपल बायलॉज (Municipal Bylaws) के आधार पर कुंभ क्षेत्र और पवित्र घाटों को 'गैर-हिंदू वर्जित क्षेत्र' घोषित किया जाए और वहां स्पष्ट चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं।

The President of Shri Ganga Sabha emphasized that this restriction should apply to everyone including government officials, contractual workers, and media personnel to maintain the sanctity of the holy site. नितिन गौतम ने आरोप लगाया कि हाल के दिनों में कुछ लोग भेष बदलकर क्षेत्र में प्रवेश कर माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से अपील की है कि किसी भी गैर-हिंदू कर्मचारी या पुलिसकर्मी की तैनाती हर की पौड़ी और संवेदनशील घाटों पर न की जाए। सभा का तर्क है कि संवैधानिक अधिकारों के दायरे में रहकर अपनी धार्मिक परंपराओं और व्यवस्थाओं की सुरक्षा करना उनका अधिकार है, और इसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा कि क्षेत्र की पवित्रता से कोई समझौता हो।

The demand has sparked a debate on the intersection of religious traditions and constitutional rights, especially with the 2026 Kumbh Mela approaching. गंगा सभा ने मीडिया संस्थानों और सूचना विभाग से भी आग्रह किया है कि वे इन क्षेत्रों में केवल हिंदू पत्रकारों की ही ड्यूटी लगाएं ताकि श्रद्धालुओं की भावनाओं को ठेस न पहुंचे। नितिन गौतम ने सभी सनातन धर्मावलंबियों से एकजुट होने की अपील करते हुए कहा कि सामूहिक प्रयासों से ही मां गंगा की मर्यादा की रक्षा संभव है। प्रशासन फिलहाल इस संवेदनशील मामले पर कानूनी सलाह ले रहा है ताकि कुंभ के दौरान कानून-व्यवस्था और धार्मिक भावनाओं के बीच संतुलन बना रहे।


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