ऊना: हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार द्वारा निराश्रित बच्चों को 'चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट' का दर्जा देने के संकल्प को धरातल पर उतारते हुए ऊना जिला प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। शुक्रवार को Deputy Commissioner Jatin Lal ने 'मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना' के तहत जिला के 10 पात्र लाभार्थियों को विवाह सहायता राशि की अंतिम किस्त के रूप में ₹60,000-₹60,000 की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) प्रदान की। उपायुक्त ने बताया कि इस योजना के अंतर्गत अनाथ बच्चों को विवाह के लिए कुल ₹2 लाख की वित्तीय सहायता दी जाती है, जिसमें से ₹1.40 लाख विवाह के समय पहले ही दिए जा चुके थे।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में शुरू की गई इस योजना का मुख्य उद्देश्य अनाथ बच्चों को केवल आर्थिक मदद देना ही नहीं, बल्कि उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाना है। उपायुक्त जतिन लाल ने जानकारी दी कि जिला ऊना में पिछले दो वर्षों के दौरान इस योजना के विभिन्न प्रावधानों के तहत लगभग ₹3.75 करोड़ की सहायता राशि वितरित की जा चुकी है। यह राशि शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास और स्टार्टअप शुरू करने जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में निराश्रित बच्चों को सुरक्षा और सम्मान प्रदान कर रही है।
डीसी ने स्पष्ट किया कि शेष राशि को एफडी के रूप में देने का निर्णय लाभार्थियों की भविष्य की आर्थिक सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है। इस अवसर पर जिला कार्यक्रम अधिकारी नरेंद्र कुमार भी मौजूद रहे। योजना के तहत पात्र बच्चों को घर बनाने के लिए वित्तीय सहायता और व्यावसायिक प्रशिक्षण के दौरान मासिक जेब खर्च (Pocket Money) देने का भी प्रावधान है। सरकार की यह पहल हिमाचल प्रदेश को देश का पहला ऐसा राज्य बनाती है जहाँ अनाथ बच्चों के कल्याण की जिम्मेदारी पूरी तरह से सरकार ने अपने कंधों पर ली है।