कश्मीर की 'चिल्लई कलां' का प्रचंड प्रहार: डल झील जमी, शून्य से 7.5 डिग्री नीचे गिरा पारा और अब बर्फबारी का अलर्ट



श्रीनगर: कश्मीर घाटी इस समय अपनी सबसे कठोर सर्दियों की अवधि 'चिल्लई कलां' (Chilla-i-Kalan) के बीचों-बीच है, जिसने जनजीवन की रफ्तार थाम दी है। बुधवार को घाटी में हाड़ कंपा देने वाली ठंड का कहर उस समय देखने को मिला जब श्रीनगर की विश्व प्रसिद्ध डल झील और कई अन्य जलाशयों के किनारे पूरी तरह जम गए। श्रीनगर में रात का तापमान शून्य से 5.2 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया, जबकि दक्षिण कश्मीर का शोपियां घाटी में सबसे ठंडा स्थान रहा, जहाँ पारा लुढ़ककर शून्य से 7.5 डिग्री नीचे चला गया। 40 दिनों की यह भीषण ठंड की अवधि, जो 21 दिसंबर से शुरू होकर जनवरी के अंत तक चलती है, अपने चरम पर है और स्थानीय नलों में पानी का जमना अब एक आम समस्या बन गया है।

The valley is currently experiencing the harshest phase of winter, known as Chilla-i-Kalan, where the chances of heavy snowfall are maximum and temperatures remain consistently sub-zero. मौसम विभाग के अनुसार, न केवल श्रीनगर बल्कि पहलगाम (शून्य से 6 डिग्री नीचे) और कुपवाड़ा (शून्य से 6.2 डिग्री नीचे) जैसे क्षेत्रों में भी कड़ाके की शीतलहर चल रही है। प्रसिद्ध पर्यटन स्थल गुलमर्ग में तापमान शून्य से 3.8 डिग्री नीचे रहा। इस भीषण सूखे और ठंड के बीच पर्यटकों और स्थानीय लोगों की नजरें अब आसमान पर टिकी हैं, क्योंकि एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) तेजी से कश्मीर की ओर बढ़ रहा है।

Meteorological officials have predicted a change in weather starting January 16, with a high probability of light to moderate snowfall across the valley. आईएमडी के अनुसार, 16 से 20 जनवरी के बीच आने वाला यह विक्षोभ न केवल सूखी ठंड से राहत देगा, बल्कि पहाड़ों को सफेद चादर से ढक देगा। विशेषज्ञों का कहना है कि चिल्लई कलां के दौरान होने वाली बर्फबारी ही साल भर घाटी के जल स्रोतों और ग्लेशियरों को रिचार्ज करने के लिए महत्वपूर्ण होती है। प्रशासन ने लोगों को इस दौरान बिजली और पानी की आपूर्ति में आने वाली बाधाओं के प्रति आगाह किया है और हीटिंग उपकरणों के इस्तेमाल के दौरान विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।



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